देवघर। सभी मीडिया बंधुओं भाईयो को अवगत कराया जाता है की इन दिनों महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर का नामांकन चल रहा है ।जिसमे नामांकन हेतु विद्यार्थियों को कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है जिसमे सबसे पहले छात्र का चांसलर पोर्टल पर अप्लाई होना जरूरी है उसके बाद नामांकन सूची में नाम आना ,ऑनलाइन एडमिशन हेतु साइबर कैफे से भुगतान , विभागाध्यक्ष के द्वारा कागजातों का निरक्षण ताकि बाद में किसी भी प्रकार की जिम्मेवारी महाविद्यालय में न रहे उसी प्रक्रिया में से एक प्रक्रिया है काउंटर से चालान प्राप्त करना और फिर स्टूडेंट कॉपी का चालान कागजात के साथ पुनः काउंटर पर जमा करना।तस्वीर देवघर महाविद्यालय ,देवघर की है जिसमे आपको पहले नजर में आपको यह नजारा किसी सिनेमा हॉल के जैसा प्रतीत होगा जहां बच्चे कागजात जमा करना काम और टिकट के लिए लगे भीड़ ज्यादा प्रतीत होता है। अव्यवस्थित प्रणाली के चलते छात्र छात्राएं सभी एक साथ धक्का मुक्की के शिकार हो रहे है ।बच्चे जमीन छोड़कर खिड़की पर चढ़े है ।यदि इस दरम्यान कोई अप्रिय घटना घट जाती है तो इसके जिम्मेवार कौन होंगे? छात्र छात्राएं ,महाविद्यालय प्रशासन या विश्वविद्यालय।हाल ही में प्रदेश के अवर शिक्षा सचिव का महाविद्यालय का निरक्षण किया गया था जिसमे देवघर महाविद्यालय को विश्वविद्यालय बनाने की बात चल रही थी । जिस महाविद्यालय में विद्यालय जैसी भी सुविधा से छात्र छात्राएं वंचित है उस जगह को विश्वविद्यालय बनाए जाने का प्रस्ताव एक सफेद हांथी के जैसा यानी व्यर्थ है । छात्र संघ के सचिव सह पूर्व सीनेट सदस्य ने इस अव्यवस्थित प्रणाली की तरफ महाविद्यालय एवम विश्वविद्यालय में संज्ञान में लेने के लिए आग्रह किया है अन्यथा यह मामला उच्च स्तरीय तक लिखा जायेगा एवम आंदोलन तक जायेगा ।
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