गहराया जल संकट, बुंद बुंद पानी के लिए तरस रहे ग्रामीण

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ईचागढ़ I सरायकेला खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र में भीषण गर्मी से जहां  लोग परेशान हैं, वहीं बढ़ते गर्मी में गांवों में जलसंकट गहराने लगी है। ग्रामीण क्षेत्र में भी लोगों को बुंद बुंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। जी हां आपको बता दूं कि 4-5 वर्ष पूर्व जल संकट से ग्रामीणों को निजात दिलाने के लिए झारखंड सरकार द्वारा निर निर्मल परियोजना के तहत दर्जनों जल मिनारों का निर्माण कराया गया,मगर लगभग जलमिनारे पानी बीन खुद प्यासे हैं और जल मिनारें एक शोभा का बस्तु बनकर रह गया है। आलम ये है कि गांव में महिलाओं को खेतों में बने कुएं के दुषीत पानी के लिए भी घंटों लाइन लगाना पड़ रहा है,तब जाकर पानी मिल रहा है। ऐसे ही एक जल संकट का  नजारा सोड़ो गांव में देखने को मिला। गांव से बाहर बने एक सिंचाई कुआं में सुबह से रात तक एक घड़ा पानी के लिए लाइन लगाना पड़ता है। कुआं की चारों ओर से महिलाएं बाल्टी पर रस्सी के सहारे पानी भरकर खींच कर उठाती है। कुआं में न घीरनी लगा हुआ है और न ही पानी भरने का सुविधा। सोड़ो गांव के आधे से अधिक आबादी इस कुआं से ही गर्मी के दिनों में प्यास बुझाते हैं। बीन पानी कराह रही जनता और जनता द्वारा चुनी गई गांव की सरकार भी चुप्पी साधे हुए हैं। सोड़ो गांव में ही जिला परिषद व मुखिया भी है ,फीर भी ग्रामीणों को एक एक बुंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।  एक गांव का ही बात नहीं पुरे प्रखंड क्षेत्र में जल मिनारें सफेद हांथी बनकर रह गया है,सुधी लेने वाले कोई नहीं। वहीं गांव के रती गोप व सितु के पूर्व मुखिया पंचानन पातर ने बताया कि यहां पेय जल का घोर अभाव है, जिससे इस कुंए का पानी मजबुरी में पीना पड़ता है। बताया कि बहुत सारे गांवों में जलमिनारे तो बने हैं,मगर सब बेकार है, सुध लेने वाले कोई नहीं है। जिम्मेदार अपने जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। उन्होंने गांव में सोलर चालीत जलमिनार व चापाकल लगाने का मांग किया है।

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