अक्टूबर 2024 में देशभर में घरेलू कोयला उत्पादन 84.47 मिलियन टन (एमटी) तक पहुंचा, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 78.57 एमटी था। यह 7.5% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं।
सरकारी प्रयास और नीतियां:
- कोयला ब्लॉकों की नियमित समीक्षा: कोयला मंत्रालय कोयला ब्लॉकों के विकास की प्रगति की नियमित समीक्षा करता है।
- एमएमडीआर अधिनियम, 2021: खदान मालिकों को वार्षिक उत्पादन का 50% खुले बाजार में बेचने की अनुमति दी गई है।
- सिंगल विंडो क्लीयरेंस पोर्टल: कोयला खदानों के संचालन में तेजी लाने के लिए एकल खिड़की अनुमोदन प्रणाली।
- परियोजना निगरानी इकाई: कोयला ब्लॉक आवंटियों को अनुमोदन प्रक्रियाओं में मदद के लिए विशेष इकाई।
- वाणिज्यिक खनन नीलामी: 2020 में शुरू की गई इस योजना के तहत खनन से जुड़े नियम सरल किए गए हैं, जिसमें एफडीआई को बढ़ावा और कोयला गैसीकरण पर प्रोत्साहन शामिल है।
कोयला कंपनियों के कदम:
- कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने भूमिगत खदानों में अत्याधुनिक तकनीक और बड़ी क्षमता वाली खदानों की योजना बनाई है।
- सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) ने कोयले की निकासी के लिए नए बुनियादी ढांचे का विकास शुरू किया है।
परिवहन सुधार:
कोयले की ढुलाई के लिए 8 रेलवे परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें से 5 चालू हो चुकी हैं और 3 निर्माणाधीन हैं। रेलवे ने कोयला परिवहन की मांग को पूरा करने के लिए मालगाड़ियों और आधुनिक तकनीकों को अपनाया है।
आंकड़े और निवेश:
चालू वित्तीय वर्ष के लिए कोयला उत्पादन लक्ष्य 1080 मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है। रेल मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2024-25 में कोयला परिवहन में सुधार के लिए 2.65 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।
यह जानकारी केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री किशन रेड्डी ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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