ओर्बेवेशन होम को लेकर पीडीजे ने डीसीपीओ और डीएसडब्ल्यू को लगाई फटकार

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दशरथ महतो/दुमका। झारखंड की उपराजधानी दुमका में स्थित ओर्बेवेशन होम का लेकर दुमका प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा ने निरीक्षण किया। उसके बाद उन्होंने समाज कल्याण पदाधिकारी अनिता कुजूर एवं जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी प्रकाश चन्द्रा को जमकर फटकार लगायी। 

ओर्बेवेशन होम की व्यवस्था काफी दयनीय है इसएिल पीडीजे काफी नाराज हुए। जानकारी अनुसार प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश अनिल कुमार मिश्रा ने सोमवार को दुमका के हिजला रोड स्थित संप्रेशण गृह का औचक निरीक्षण किया और निरीक्षण के दौरान आवासित बच्चों का चापानल ख़राब, और बाथरूम की खराब स्थिति देख विफर पड़े। उनहोंने डीएसडब्ल्यूओ और डीसीपीओ को त्वरित रूप से इन समस्याओं को दूर करने का निर्देश दिया। 

बच्चों को शिक्षा अभियान से जोड़ने का निर्देश 

उन्होंने डीसीपीओ को और अन्य पदाधिकारी को बच्चों को शिक्षा अभियान से जोड़ने के साथ ही शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने का आदेश दिया। उन्होंने साहिबगंज और पाकुड़ के बच्चों को प्रोडक्शन मे हो रही समस्या से निजात पाने के लिए अविलम्ब वीसी को ठीक कर चालू करने का आदेश दिया। इस दौरान आज सोमवारी का शिवव्रत रहने के कारण कई बच्चे उपवास मे थे इनके व्रत और खाने के लिए लाये गये फलो को भी देखा. निरीक्षण के क्रम मे उन्होंने रशोई एवं अन्य स्थानों को साथ रखने का निर्देश कर्मियों को दी. निरीक्षण के क्रम मे न्यायिक दंडधिकारी प्रथम श्रेणी विजय कुमार यादव, डालसा सचिव विश्वनाथ भगत, डीपीओ सहित कई पदाधिकारी मौजूद थे।

डीसीपीओ के पत्नी और भगिनी को नौकरी देने की चर्चा 

दुमका के समाज कल्याण विभाग मे ंतैनात डीसीपीओ प्रकाश चन्द्रा ने अपनी पत्नी को ही नौकरी दे दिया है उनकी पत्नी दुमका धधकिया स्थित बालिका गृह में काम करती है वहां कांउसलर के पद पर तैनात है। सूत्रों के अनुसार डीसीपीओ के पत्नी डोली कुमारी को नौकरी दिलाने के लिये विकास भारती ने स्पेशल वैंकेसी निकाली ओर उसके बाद इंटरव्प्यू के बिना ही डीसीपीओ के पत्नी होने के कारण डोली कुमारी को बालिका गृह को कांउसलर बना दिया है। डीसीपीओ की पत्नी होने के कारण डोली कुमारी प्रत्येक दिन बच्चों का कांउसिलिंग करने भी नहीं जाती है। इन मामले की व्यापक जांच होने पर पता चलेगा कि प्रत्येक एनजीओ में डीसीपीओ का रिेश्तेदार काम कर रहा है।  विडियो वायरल के बाद भी शिक्षक सुमित गुप्ता पर नहीं हुई कार्रवाई 

सप्रेषण गृह दुमका में शिक्षक के रूप में तैनात सुमित गुप्ता का घुस लेते विडियो वायरल हो गया। उसके बाद भी जिला प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। यह चर्चा है कि सुमित गुप्ता और डीसपीओ एक ही जाति के है इसलिए सुमित गुप्ता को डीसीपीओ ने बचा लिया। सुमित गुप्ता के नौकरी को लेकर चर्चा है कि वह नियुक्ति लिस्ट मे ंपांचवें स्थान पर उसके बाद बावजूद उसे डीसीपीओ के कृपा से नौकरी मिल गयी। पूर्व में घुस लेने का विडियो सामने आने के बाद सुमित गुप्ता ने कहा था वह किताब के लिये पैसा ले रहा था। सवाल उठता है क्या किसी शिक्षक को संप्रेषण गृह में किताब उपलब्ध करवाने के लिये पैसा लेने का अधिकार है। सूत्र बताते है शिक्षक सुमित गुप्ता दिन रात ट्यूशन पढ़ाते है और बच्चों की शिक्षा के लिये चितित नहीं है। 

गृहपति के भरोसे चलाया जा रहा है सप्रेषण गृह

जानकारी के अनुसार सप्रेषण गृह में अधीक्षण के रूप में समाज कल्याण पदाधिकारी को काम करना है क्योंकि इस पद का प्रभार उन्हीं के पास लेकिन गृहपति अब्दुल गफ्फार के पास राजनीतिक पैरवी होने के कारण उसे पदाधिकारी का दायित्व दे दिया गया है जबकि यह दायित्व समाज कल्याण पदाधिकारी को संभालना था। गृहपति पूर्व में जेल भी गये थे बावजूद भी डीसीपीओ ने गृहपति को बचा लिया और अब पीडीजे के निरीक्षण के बाद पूरे व्यवस्था पर ही सवाल उठ गया। 

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