दुमका: जिले के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत अनुबंध कर्मियों ने अपने भविष्य निधि (ईपीएफ) के लंबित अंशदान को लेकर चिंता जताई है। इन कर्मियों का पिछले 32 से 42 महीनों का कर्मचारी अंशदान उनके ईपीएफ खातों में जमा नहीं किया गया है, जबकि हर माह उनके मानदेय से यह राशि काटी जा रही थी। बकाया राशि लगभग तीन से चार करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिसे अब तक खातों में जमा नहीं किया गया है।
अनुबंध कर्मियों का कहना है कि उन्होंने पिछले दो साल से सिविल सर्जन कार्यालय, दुमका का चक्कर काटा है, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। सिविल सर्जन डॉ. बच्चा सिंह ने कुछ महीने पहले कहा था कि एक एएनएम के आधार कार्ड में त्रुटि के कारण अंशदान राशि लंबित है, और त्रुटि सुधारने के बाद ही राशि जमा की जाएगी। इस देरी के चलते अनुबंध कर्मियों को नियोक्ता अंशदान में भी बड़ा नुकसान हो रहा है, जिससे वे नाराज और आक्रोशित हैं।
ईपीएफ प्रक्रिया के तहत प्रखंड स्तर पर हर माह अनुबंध कर्मियों के मानदेय से राशि काटी जाती है, जिसे सिविल सर्जन कार्यालय में जमा किया जाता है। लेकिन इस कटौती की गई राशि को अनुबंध कर्मियों के खातों में नहीं भेजा गया है, जिससे कर्मियों का भविष्य सुरक्षित नहीं है।
अनुबंध कर्मियों ने दुमका के उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर हस्तक्षेप की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही ईपीएफ अंशदान की राशि जमा नहीं की गई, तो वे धरना, प्रदर्शन, और कार्य बहिष्कार पर जाने को मजबूर होंगे। कर्मियों ने यह भी कहा है कि वे मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, दुमका विधायक और राज्य स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को भी लिखित शिकायत देंगे।
इस समस्या के समाधान न होने पर कर्मी न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की भी योजना बना रहे हैं। इस मौके पर कई अनुबंध कर्मियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें मेरी सोरेन, लग्नेश हेम्ब्रम, सुपल्लवी सोरेन, गीता कुमारी, अनिता मुर्मू, मीनू टुडु आदि शामिल थे।