संताल परगना में बढ़ते मुस्लिम आबादी से डेमोग्राफिक चेंज: बाबूलाल

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रांची, झारखंड – झारखंड में आदिवासियों की घटती जनसंख्या पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने एक बार फिर राज्य सरकार को घेरा है। मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए श्री मरांडी ने कहा कि संथाल परगना की डेमोग्राफी में अप्रत्याशित बदलाव आए हैं, जो डेमोक्रेसी के लिए खतरा है और सभी के लिए चिंता का विषय है।

1951 और 2011 की जनगणना रिपोर्ट के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 1951 में झारखंड में आदिवासियों की आबादी 36% थी जो 2011 में घटकर 26% रह गई। इसके विपरीत मुस्लिम आबादी 1951 में 8.9% से बढ़कर 2011 में 14.5% हो गई। संथाल परगना में आदिवासियों की जनसंख्या 1951 में 44.67% थी, जो 2011 में घटकर 28.11% रह गई, जबकि मुस्लिम आबादी 9.44% से बढ़कर 22.73% हो गई।

श्री मरांडी ने कहा कि यह परिवर्तन आदिवासी समाज के लिए विशेष रूप से हानिकारक है। उन्होंने भाजपा द्वारा किए गए मतदाता सर्वे के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2019 से 2024 की मतदाता सूची में संथाल परगना के 10 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में 20 से 123% तक की वृद्धि हुई है। भाजपा ने इसे लेकर चुनाव आयोग में ज्ञापन सौंपा है और जांच की मांग की है।

श्री मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर घटती आदिवासी आबादी के कारणों की जांच के लिए एक एसआईटी गठित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की जनसंख्या में इस कमी से लोकसभा, विधानसभा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण पर भी खतरा मंडरा रहा है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह किया है ताकि आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा की जा सके और राज्य की डेमोग्राफी को संतुलित रखा जा सके।

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