दुमका। सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय (एसकेएमयू) के अंग्रेजी विभाग की प्राध्यापक डॉ. अंजुला मुर्मू ने कहा है कि शिक्षा में स्थिरता और लचीलापन केवल आकांक्षाओं के लक्ष्य नहीं हैं, बल्कि हमारी तेजी से बदलती दुनिया में आवश्यकताएं हैं।
डॉ. मुर्मू 7 अगस्त को यूनाइटेड किंगडम के लंदन ऑर्गनाइजेशन ऑफ स्किल्स डेवलपमेंट (एलओएसडी) द्वारा आयोजित ग्लोबल रिसर्च कॉन्फ्रेंस (जीआरसी) को मुख्य अतिथि के रूप में ऑनलाइन संबोधित कर रही थीं। जीआरसी ज्ञान के आदान-प्रदान और नवाचार के लिए एक अद्वितीय मंच प्रदान करता है। इस वर्ष की थीम ‘बदलती दुनिया में शिक्षा के क्षेत्र में स्थिरता और लचीलापन 2024’ है। इस सम्मेलन में यूके, यूएसए, कनाडा, भारत, तंजानिया, दुबई, चीन, सिंगापुर, जर्मनी, पाकिस्तान, अफ्रीका, हवाई, कजाखस्तान सहित कई देशों के विद्वान भाग ले रहे हैं।
अपने संबोधन में डॉ. अंजुला मुर्मू ने पाठ्यचर्या विकास, संस्थागत प्रथाओं, भावनात्मक और सामाजिक शिक्षा, अनुकूलनशीलता और लचीलेपन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों, नीति निर्माताओं और वैश्विक समुदाय के सदस्यों के रूप में यह हमारी जिम्मेदारी है कि एक ऐसी शिक्षा प्रणाली बनाएं जो व्यक्तियों को ज्ञान, कौशल और मूल्यों से सुसज्जित करे। उन्होंने टिकाऊ और लचीले भविष्य की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. मुर्मू अपने शोध और जीआरसी में भाषणों के माध्यम से भारतीय युवाओं को उनके सामाजिक और व्यावसायिक जीवन को मजबूत करने के लिए कौशल हासिल करने में मदद करना चाहती हैं। उनकी राय में एक सुशिक्षित व्यक्ति वह है जो न केवल शिक्षा में उत्कृष्ट है, बल्कि दैनिक जीवन में आवश्यक कार्यों को भी अच्छे से करता है।
डॉ. मुर्मू ने कहा, “युवाओं को जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता की आवश्यकता है, बल्कि संचार, टीम वर्क और रचनात्मकता जैसे सॉफ्ट कौशल की भी आवश्यकता है। जीआरसी के माध्यम से उनका इरादा भारतीय युवाओं को उनके लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करने और मजबूत करने का है।”
लंदन ऑर्गनाइजेशन ऑफ स्किल्स डेवलपमेंट (एलओएसडी) शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और युवा विकास के माध्यम से मानवता को सशक्त बनाने के लिए समर्पित है। वैश्विक अनुसंधान सम्मेलन 2024 (जीआरसी), 7-8 अगस्त को एलओएसडी द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
डॉ. मुर्मू एक शिक्षिका और सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते पहले ही साहित्य और कौशल विकास पर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उन्होंने कैंब्रिज, लंदन से प्रकाशित होने वाली पुस्तक “द बुक ऑन फॉरगिवनेस” में एक अध्याय भी लिखा है, जो 9 अगस्त को रिलीज़ होने वाली है।