दुमका: सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका और इसके अंतर्गत सभी अंगीभूत महाविद्यालयों के शिक्षकेतर कर्मचारियों की हड़ताल को 57 दिन हो गए हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान अब तक नहीं हो सका है। कर्मचारियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति उनकी जायज मांगों को लेकर संवेदनहीनता दिखा रहे हैं।
कर्मचारियों की नाराजगी और कुलपति पर आरोप
महासंघ के महासचिव नेतलाल मिर्धा ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कर्मचारी बिना वेतन के अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कुलपति उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, “ताला तुड़वाने में जो तत्परता कुलपति और प्रशासन ने दिखाई, अगर उतनी ही तत्परता वेतन निर्धारण के मुद्दे पर दिखाई होती, तो आज हड़ताल की नौबत नहीं आती।”
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कुलपति परीक्षा कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, लेकिन कर्मचारियों के वेतन निर्धारण या उच्च शिक्षा निदेशालय के सचिव से वार्ता करने के लिए तैयार नहीं हैं।
उच्च शिक्षा निदेशालय में कागजातों की जांच जारी
महासंघ के अध्यक्ष परिमल कुंदन ने जानकारी दी कि वे पिछले 5 दिनों से उच्च शिक्षा निदेशालय में रहकर सभी कर्मचारियों के कागजात समर्पित कर चुके हैं। हालांकि, कागजातों की जांच प्रक्रिया बहुत धीमी गति से चल रही है। उन्होंने बताया कि निदेशालय के दो अंकेक्षक कागजातों की गहन जांच कर रहे हैं, लेकिन जांच की रफ्तार को देखते हुए यह प्रक्रिया पूरी होने में अभी महीनों लग सकते हैं।
कर्मचारियों के प्रति प्रशासन की उदासीनता
श्री कुंदन ने विश्वविद्यालय प्रशासन की उदासीनता और संवेदनहीनता को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। कर्मचारियों ने यह स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रखेंगे।
संवेदनशील समाधान की जरूरत
शिक्षकेतर कर्मचारियों की यह हड़ताल सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के प्रशासन और कर्मचारियों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है। कर्मचारियों ने उम्मीद जताई है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान निकालेगा, ताकि विश्वविद्यालय का सामान्य कामकाज पटरी पर लौट सके।