]
दस विश्वविद्यालय के साथ एसकेएमयू में लिंग भेद पर शोध की शुरूआत
सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय की रिसर्च टीम डॉ स्वाति नेतृत्व दे रही है प्रशिक्षण
दुमका। सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय में जेंडर सेंसिटाईज़ेशन पर शिक्षकों तथा विद्यार्थियों के साथ दो दिवसीय कार्यशाला का आरंभ हुआ। इस कार्यशाला के लिए सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से डॉ स्वाति दहाद्रोय के नेतृत्व में रिसर्च टीम आयी हुई है। इस टीम में रांची विश्वविद्यालय के वीमेन स्टडी सेंटर की संयोजिका, डॉ ममता कुमारी, तथा सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी की तीन शोध छात्राएं, समिका, भाग्यश्री तथा नुपुर, भी शामिल हैं। पहले दिन पीजी के शिक्षकों तथा एस पी कॉलेज व एस पी महिला कॉलेज के शिक्षकों के साथ जेंडर पर चर्चा हुई। डॉ स्वाति ने पॉवरपॉइंटके माध्यम से लिंग भेद को सामने रखा।
दूसरा सेशन विद्यार्थियों के साथ किया गया, जिसमे विश्वविद्यालय के 16 पी जी विभागों के छात्र छात्राओं ने भाग लिया। छात्रों के साथ नुक्कड़ – नाटक, छोटे खेल, वीडियो इत्यादि के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों में उन्हें शामिल कर जेंडर के प्रति संवेदनशीलता जैसे मुद्दे से छात्रों को अवगत कराया गया। यह कार्यशाला सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय द्वारा सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय एवं ब्रुनेल विश्वविद्यालय, लंदन के साथ हुए एमओयू का ही एक हिस्सा है। यह एक अंतराष्ट्रीय स्तरीय शोध प्रोजेक्ट है जिसमें भारत के 10 शिक्षण संस्थान शामिल हैं, जिनमे से एक सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय है। यह शोध उच्च शिक्षा में स्त्रियों की भागीदारी संबंधी तथ्यों तथा आंकड़ो को इकट्ठा करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य एक जेंडर ऑडिट टूल तैयार करना है। इसी वर्ष मार्च में इस शोध से जुड़ी रिसर्च टीम ने सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय का तीन दिवसीय दौरा किया था एवं यहां के विद्यार्थियों, शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों, प्रशासनिक अधिकारियों का साक्षात्कार लिया तथा आंकड़े इकट्ठा किये। इसी शोध को आगे बढ़ाते हुए इस प्रोजेक्ट के तहत सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय की चार शिक्षिकाओं को एक एक्शन रिसर्च प्रोजेक्ट भी दिया गया है जो ब्रिटिश कौंसिल, लंदन द्वारा संपोषित है।
कार्यशाला के आयोजन में सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय की इंटरनल कंप्लेंट कमिटी भी एक साझेदार थीं। इसकी संयोजिका डॉ निर्मला त्रिपाठी ने आयोजन में भरपूर सहयोग दिया। एमओयू से जुड़ी प्रोफेसर मेरी मार्गरेट टुडू एवं प्रोफेसर अमिता कुमारी ने भी आयोजन में अपनी भूमिका निभाई। कार्यशाला को सफल बनाने में प्रोफेसर सनोज हेम्ब्रम एवं प्रोफेसर ज्योत्स्ना बा ने भी योगदान दिया। इतिहास विभाग के विद्यार्थी, विक्रम दास, आदित्य गौरव, फूल कुमारी व दीपिका टुडू ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
