दुमका में जमीन माफियाओं का बढ़ता आतंक: कैशरगढ़ में विवादित जमीन पर कब्जा

दुमका, झारखंड – झारखंड की उपराजधानी दुमका में जमीन माफियाओं का मनोबल इतना बढ़ गया है कि आम लोग परेशान हो रहे हैं। ताज़ा मामला शिकारीपाड़ा अंचल के कैशरगढ़ गांव का है, जहां जमीन विवाद ने गंभीर रूप धारण कर लिया है।

 विवाद की शुरुआत

कैशरगढ़ गांव के निवासी आनंद राय, अशोक राय और पांचू राय के बीच उनके विरोधी कंचन राय, अशोक राय और संजय राय के साथ एक जमीन को लेकर लम्बे समय से विवाद चल रहा है। यह विवाद बंदोबस्त कार्यालय में कैशरगढ़ मौजा के जमाबंदी नंबर 03 के तहत आपत्ति वाद 03/2027 के रूप में दर्ज है और न्यायालय में सुनवाई जारी है। बावजूद इसके, कंचन राय, अशोक राय और संजय राय ने विवादित जमीन को काशीनाथ पाल नामक व्यक्ति को बेच दिया।

 प्रशासन की अनदेखी

जमीन खरीदते ही काशीनाथ पाल ने तुरंत उस पर घर बनाने का काम शुरू कर दिया। जब यह बात आनंद राय, अशोक राय और पांचू राय को पता चली, तो उन्होंने शिकारीपाड़ा थाना में इसकी शिकायत दर्ज करवाई। लेकिन, थाना पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। निराश होकर पीड़ितों ने अंचलाधिकारी को भी जमीन पर चल रहे कार्य को रोकने के लिए आवेदन दिया, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने कोई जांच नहीं की।

पीड़ितों की व्यथा

पीड़ित आनंद राय, अशोक राय और पांचू राय का कहना है कि उन्होंने शिकारीपाड़ा अंचलाधिकारी और थाना प्रभारी को आवेदन दिया है, लेकिन काशीनाथ पाल तेजी से काम करवा रहा है। पीड़ितों का आरोप है कि काशीनाथ पाल की शिकारीपाड़ा थाना और अंचल कार्यालय में अच्छी पहुंच है, जिसके चलते प्रशासन उनके पक्ष में कार्रवाई नहीं कर रहा है। इससे स्थानीय निवासियों में रोष और असंतोष बढ़ रहा है।

प्रशासनिक लापरवाही

जब पीड़ितों की जानकारी मिलने के बाद शिकारीपाड़ा थाना प्रभारी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि यह मामला अंचल कार्यालय का है और पुलिस का इसमें कोई काम नहीं है। हालांकि, इससे पहले कई मामलों में पुलिस ने जमीन विवाद के तुरंत बाद मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की है। यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

निष्कर्ष :

झारखंड के दुमका में जमीन माफियाओं का आतंक और प्रशासन की अनदेखी से स्थानीय निवासियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले में न्याय की उम्मीद लगाए बैठे पीड़ित प्रशासनिक कार्रवाई की आस में हैं। अगर समय रहते इस मुद्दे का समाधान नहीं निकला, तो यह विवाद और भी गंभीर हो सकता है।

 

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