प्रधानमंत्री मोदी ने आईएमडी के 150वें स्थापना दिवस पर’मिशन मौसम’

PM launches ‘Mission Mausam’ with the goal of making ‘Weather-ready and Climate-smart’ nation at Bharat Mandapam, in New Delhi on January 14, 2025.

प्रधानमंत्री मोदी ने किया ‘मिशन मौसम’ का शुभारंभ, आईएमडी के 150वें स्थापना दिवस पर जारी किया विज़न-2047

नई दिल्ली, 14 जनवरी (भारत बुलेटिन):
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के 150वें स्थापना दिवस के अवसर पर ‘मिशन मौसम’ की शुरुआत की। इस मिशन का उद्देश्य देश को हर मौसम और जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए तैयार एक ‘स्मार्ट राष्ट्र’ बनाना है।

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय राजधानी स्थित भारत मंडपम में आयोजित किया गया, जहां प्रधानमंत्री ने आईएमडी के 150वें स्थापना दिवस पर एक स्मारक सिक्का और ‘आईएमडी विज़न-2047’ दस्तावेज़ भी जारी किया। इस दस्तावेज़ में मौसम पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और प्रबंधन की योजनाएं शामिल हैं।

इससे पहले, प्रधानमंत्री ने आईएमडी की उपलब्धियों पर आधारित एक प्रदर्शनी का अवलोकन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “आईएमडी के 150 साल सिर्फ विभाग की यात्रा नहीं है, बल्कि यह भारत में आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भी यात्रा है।”

उन्होंने यह भी कहा कि आईएमडी ने न केवल करोड़ों भारतीयों की सेवा की है, बल्कि भारत की वैज्ञानिक यात्रा का भी प्रतीक बना है। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में आईएमडी की तकनीकी और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

क्या है ‘मिशन मौसम’?
प्रधानमंत्री ने कहा, “‘मिशन मौसम’ टिकाऊ भविष्य और जलवायु से निपटने की भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।” इस मिशन के तहत आधुनिक मौसम निगरानी तकनीक, उच्च-रिज़ॉल्यूशन वायुमंडलीय अवलोकन, नई पीढ़ी के रडार और उपग्रहों के साथ उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटरों को विकसित किया जाएगा।

यह मिशन वायु गुणवत्ता डेटा प्रदान करने, मौसम प्रबंधन रणनीति बनाने और जलवायु प्रक्रियाओं की बेहतर समझ पर केंद्रित होगा।

कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित
आईएमडी के 150वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में विभाग की ऐतिहासिक उपलब्धियों और जलवायु-अनुकूल भारत बनाने में उसकी भूमिका को दर्शाने के लिए कई कार्यक्रम, कार्यशालाएं और गतिविधियां आयोजित की गई हैं।

प्रधानमंत्री के इस कदम को भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के क्षेत्र में एक बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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