मुख्यमंत्री ने अपने धुर विरोधी स्थानीय भाजपा सांसद पर परोक्ष रूप से साधा निशाना
गोड्डा। खतियानी जोहार यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा के राजनीतिक गढ़ संथाल परगना प्रमंडल में पहली सभा गोड्डा में की। यहां से मुख्यमंत्री देवघर के लिए रवाना हो गए। खतियानी जोहार यात्रा के दौरान दूसरी सभा देवघर में होगी। जाहिर है खतियानी जोहार यात्रा के तहत मुख्यमंत्री की पहली और दूसरी सभा गोड्डा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत होगी। इसके पीछे के राजनीतिक निहितार्थ को राजनीतिक प्रेक्षक अपने-अपने अंदाज में टटोल रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि गोड्डा और देवघर में पहली और दूसरी रैली का मुख्यमंत्री अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड जनता के समक्ष रखने के साथ ही गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ माहौल बनाने की रणनीति पर भी अमल कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बीच राजनीतिक धींगामुश्ती जगजाहिर है। दोनों एक दूसरे को राजनीतिक रूप से पटकनी देने के लिए निरंतर मौके की तलाश में रहते हैं। दोनों के बीच शब्द बाण के दौर चलते रहते हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधने के साथ ही परोक्ष रूप से स्थानीय भाजपा सांसद पर भी निशाना साधा। उन्होंने सांसद का नाम लिए बगैर कहा कि जो 1932 के खतियानी कानून को बांग्लादेशी कहते हैं, झारखंड को ठग प्रदेश कहते हैं, उन्हें सबक सिखाइए। जो बाहरी हमारी जमीन पर खड़ा होकर हमें ही गाली दे रहा हो, उन्हें गांव में घुसने नहीं दीजिए। बताते चलें कि 1932 के खतियान संबंधी मामले को लेकर सांसद निशिकांत दुबे सरकार पर हमलावर रहे हैं। अपने एक ट्वीट में उन्होंने झारखंड को ठग प्रदेश तक कहा था।
मुख्यमंत्री ने कहा, आज महंगाई चरम पर है। आलू, प्याज, तेल, दाल के भाव आसमान छू गए हैं। आपके जेब का पैसा तो बढ़ नहीं रहा, लेकिन खाने पीने का सामान, पहनने का सामान, आवागमन का सामान, सबके दाम में बढ़ोत्तरी हो रही है। नौकरी मिल नहीं रहा है, कंपनियां खुल नहीं रही है। चंद लोगों के हाथ में पूरा देश की कमान, बैंकों की कमान है। रिजर्व बैंक में नोट छापने की मशीन यह लोग हैं। एक- एक रुपये के लिए घुटने टिकवायेगा। कहां गया फ्री का गैस सिलेंडर।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार सभी योग्य लोगों को वृद्धा पेंशन दे रही है, तो क्या हम गलत कर रहे हैं। क्या बुजुर्गों को पेंशन देना गलत काम है। ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देना गलत है। इस राज्य के अलग होने के बाद ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण मिलता था, लेकिन इन्हीं लोगों (भाजपा) ने ओबीसी का आरक्षण खत्म करके 14 प्रतिशत कर दिया था। 20 साल में ओबीसी के प्रति कोई संभावना नहीं थी। लेकिन आज हमने 27 प्रतिशत ओबीसी को आरक्षण देने का कानून बनाया है। क्या इस राज्य में 1932 लागू करना गलत है। 1932 वाले को यह लोग बांग्लादेशी बोलता है। झारखंडी और झारखंड को ठगों का राज्य बोलता है। जो ऐसी बातें करता है, उसको आप लोग सबक सिखाइए। हमारी जमीन में खड़ा होकर, हमारी खाकर हमही को गाली देता है। ऐसा नहीं चलेगा। ऐसे लोगों को यह राज्य बर्दाश्त नहीं करेगा। यहां का ख़ातियानी बर्दाश्त नहीं करेगा। यहां का आदिवासी, मूलवासी कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। इन लोगों ने तो इस राज्य को चारागाह बना कर रख दिया था। थोड़ा सा विलंब से ही सही, लेकिन इन को सत्ता से बेदखल कर दिया। 20 साल लग गया इन लोगों को सत्ता से बेदखल करने के लिए। 40 साल लग गया इस राज्य को अलग करने के लिए। इस राज्य को हम लोगों ने अलग किया है, तो हम लोग मिलकर इस राज्य को संवारने का काम करेंगे। इन बेइमानों को बाहर निकालने का काम करेंगे।
The short URL of the present article is: https://bharatbulletin.in/h0r2