कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि पुलिस उपमहानिरीक्षक सुदर्शन प्रसाद मंडल ने दीप प्रज्वलित कर किया
कार्यक्रम में कवियों एवं लेखकों को शॉल देकर सम्मानित किया।
आयुक्त कार्यालय,संताल परगना के सभाकक्ष में प्रमंडलीय राजभाषा विभाग द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर विचार गोष्ठी सह कवि सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सर्व प्रथम मुख्य अतिथियों को पौधा देकर सम्मानित कर, कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस उप महानिरीक्षक सुदर्शन प्रसाद मंडल एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में उपायुक्त रविशंकर शुक्ला, प्रशिक्षु आईएफएस सात्विक, प्राचार्य खिरोधर प्रसाद यादव, विभागाध्यक्ष डॉ विनय कुमार सिन्हा, सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रमोदिनी हांसदा, कवि एवं लेखक विनय सौरभ उपस्थित थे।
इस अवसर पुलिस उपमहानिरीक्षक सुदर्शन प्रसाद मंडल ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि हिंदी भाषा जनसंपर्क का माध्यम है इसकी सरलता पर ध्यान देने की आवश्यकता है। कठिन शब्दों को आसान भाषा में व्यक्त करना चाहिए। हिंदी भाषा को मान व सम्मान देना देश के प्रत्येक नागरिक का प्रथम दायित्व बनता है। इसलिये हमें राष्ट्रभाषा के सम्मान में हमेशा आगे आना चाहिए।
उन्होंने बताया कि हर देश की भाषा उस देश को मजबूत करती है। हिन्दी ने हमें विश्व में एक नई पहचान दिलाई है।
उपायुक्त रविशंकर शुक्ला ने हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भाषा की कई सारी भूमिकाएं है। भाषा दूरी को कम करने के लिए महत्वपूर्ण होती है। चाहे वो विचारों की दूरी हो या लोगों के बीच की दूरी। भाषा लोगों को जोड़ने का कार्य करती है। हिंदी भाषा दिवस एक सांकेतिक प्रतीक हो सकता है लेकिन इसी बहाने हम एक दूसरे से जुड़े रहे एवं दूरियों को कम करने के लिए सजग होंगे।
इस अवसर पर प्रशिक्षु आईएफएस सात्विक ने कहा कि देश के किसी भी महानगर में यदि हिंदी भाषा सुनने को मिलती है। तो देश की जीत है जो लोग अपनी जड़ों से हटकर देश के कोने-कोने में जाकर हिंदी भाषा का बीज बोया है।
हिंदी भाषा का प्रसार प्रचार में सिनेमा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। लोग अस्सी नब्बे के दशक से सिनेमा देखते आ रहें है। जिसमें हिंदी भाषा का प्रयोग किया जाता रहा है। लोगों में अपने भाषाओं के प्रति समर्पण दिखाई देता है। जो लोगों को जोड़ कर रखता है।
प्रभारी उपनिदेशक राजभाषा जुगनू मिंज ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि 1950 में 14 सितंबर को संविधान में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया। तब से प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के तौर पर मनाते हैं। हिंदी भाषा के प्रति नैतिक दायित्व होना चाहिए। शैक्षणिक संस्थानों,विद्यालयों, कार्यालयों एवं दिनचर्या में हिंदी भाषा का उपयोग करना चाहिए। हिंदी भाषा दुनियाभर में हमें सम्मान दिलाती है। यह भाषा हमारे सम्मान, स्वाभिमान और गर्व है।
इस दौरान डॉ खिरोधर प्रसाद यादव, डॉ विनय कुमार सिन्हा, सेवानिवृत्त डॉ प्रमोदिनी हांसदा एवं लेखक एवं कवि विनय सौरभ ने भी अपनी विचारों को साझा किया।
इस दौरान कलाकारों ने जय जय भाषा भारती एवं हिंदी विषयों पर अपनी प्रस्तुति दी। इस अवसर पर उपस्थित जिले के कवियों, लेखकों एवं हिंदी के प्राचार्यों को शॉल देकर सम्मानित किया गया।
