आश नारायण मिश्र , काठमांडू I खुलासा हुआ है कि नेपाली सेना बिना प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के चीन से 6 अरब रुपये के हथियार खरीदने की तैयारी कर रही है। ओन लाइन डॉट कॉम नेपाल के सूत्रों का दावा है कि पूर्ण बहादुर खड़का के रक्षा मंत्री बनने के तुरंत बाद ही नेपाली सेना की योजना चीनी कंपनी नोरिन्को से नेपाली एजेंट लोकेंद्र कार्की के जरिए चीनी हथियार खरीदने की थी ।
कहा जाता है कि सेना 26 बख्तरबंद कार्मिक वाहन (एपीसी) और 72 सामरिक वाहन खरीदने की योजना बना रही है। हालांकि, सूत्र ने कहा कि बिना पारदर्शी प्रक्रिया का पालन किए काठमांडू में चीनी दूतावास के जरिए चीन से हथियार खरीदे जा रहे हैं।
प्रत्येक एपीसी की कीमत 77.7 मिलियन रुपये है, जो बाजार मूल्य से काफी अधिक है। सूत्रों के मुताबिक, नेपाली कांग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री ज्ञानेंद्र बहादुर कार्की के भाई कार्की की मदद से नेपाली सेना स्थानीय एजेंटों को बदलने और चीन से बड़ी मात्रा में हथियार खरीदने की योजना बना रही है।
नेपाली सेना ने आरोपों का जवाब नहीं दिया है। नेपाली सेना के सहायक प्रवक्ता कृष्ण प्रसाद भंडारी ने कहा कि उन्हें नेपाली सेना द्वारा हथियारों की खरीद के बारे में कोई जानकारी नहीं है । रक्षा मंत्रालय ने भी कथित हथियारों की खरीद के बारे में किसी भी तरह की जानकारी से इनकार किया है।
सूत्रों का दावा है कि नेपाली सेना के उच्च पदस्थ अधिकारी अस्थिर राजनीतिक स्थिति और संक्रमण काल का लाभ उठाकर हथियारों की खरीद में संभावित हेरफेर और बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी में शामिल हैं। यह आरोप लगाया जाता है कि बड़े कमीशन की इच्छा राजनीतिक नेतृत्व को उच्चतम स्तर पर प्रभावित कर रही है और खरीद प्रक्रिया में संभावित बाधाएं पैदा कर रही है।
आरोप है कि लोकेंद्र कार्की ने बिना सरकार की अनुमति के सिंगापुर में ग्लोबल होल्डिंग नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड नामक एक कंपनी की स्थापना की, कमीशन का निपटान किया, खरीद मूल्य बढ़ाया और विदेशों से नेपाल को भुगतान करके बड़ी मात्रा में धन का गबन किया।
प्राधिकरण के दुरुपयोग की जांच के लिए आयोग के पूर्व मुख्य आयुक्त और पूर्व सचिव सूर्यनाथ उपाध्याय की राय है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को महत्व देते हुए हथियारों को गुप्त रूप से खरीदा जाना चाहिए।
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