नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले मामले में निचली अदालत से मिली जमानत पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने केजरीवाल की जमानत को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील की थी। ED का कहना है कि इस महत्वपूर्ण चरण में केजरीवाल को रिहा करने से जांच प्रभावित हो सकती है क्योंकि वह मुख्यमंत्री के पद पर हैं।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान, केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिका पर जल्द सुनवाई की जरूरत को खारिज कर दिया, लेकिन जस्टिस सुधीर जैन ने कहा कि जब तक हाईकोर्ट में सुनवाई लंबित है, तब तक निचली अदालत का आदेश प्रभावी नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि निचली अदालत ने एक दिन पहले ही केजरीवाल को जमानत दी थी।
ईडी की ओर से पेश ASG राजू ने कहा कि निचली अदालत ने उन्हें मामले पर बहस करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया, और PMLA की धारा 45 का हवाला देते हुए कहा कि उनका मामला मजबूत है। वहीं, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मोदी सरकार पर न्यायिक प्रक्रिया का मजाक बनाने का आरोप लगाया।
क्या है दिल्ली का कथित शराब घोटाला?
दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर 2021 को एक्साइज पॉलिसी 2021-22 लागू की थी, जिसके तहत शराब कारोबार निजी हाथों में सौंप दिया गया था। सरकार का दावा था कि नई नीति से माफिया राज खत्म होगा और राजस्व में बढ़ोतरी होगी। हालांकि, विवाद बढ़ने पर 28 जुलाई 2022 को इस नीति को रद्द कर दिया गया।
दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव नरेश कुमार की रिपोर्ट में मनीष सिसोदिया समेत कई नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद CBI और ED ने जांच शुरू की। रिपोर्ट में कहा गया कि नई नीति के जरिए लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और कोविड के बहाने 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ कर दी गई।