देवघर। संप चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, देवघर के अध्यक्ष आलोक मल्लिक और महासचिव प्रमोद छावछरिया की अगुवाई में चैम्बर का एक प्रतिनिधिमंडल माप एवं तौल निरीक्षक के कार्यालय का दौरा किया। कई व्यापारियों की शिकायतें इस कार्यालय के बाबत मिल रही थी कि माप-तौल निरीक्षक अपने निर्धारित दिनों में भी कार्यालय में कम ही मिलते हैं और लाइसेंस एवं रिन्युअल में काफी परेशानियां होती है। इसी संदर्भ में चैम्बर आज अचानक उनके कार्यालय पहुंचकर मामले की तहकीकात किया। निरीक्षक आज दिन में डेढ़ बजे भी अपने कार्यालय में उपस्थित नहीं मिले जबकि विभाग के कंट्रोलर के पत्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार उनका कार्यदिवस देवघर में बुध, बृहस्पति और शुक्रवार निर्धारित है। वहां पहुंचने के बाद चैम्बर अध्यक्ष ने इसकी शिकायत मोबाइल पर कॉल कर कंट्रोलर श्री के. सी. चौधरी से बात की तो उन्होंने सहायक कंट्रोलर दुमका से संपर्क करने को कहा। सहायक कंट्रोलर ने कई बार कॉल करने के बावजूद मोबाइल रिसीव नहीं किया। जब चैम्बर ने कार्यालय में फोटो और वीडियो बनाया तो सहायक संजीव कुमार ने मोबाइल पर निरीक्षक श्री उपेन्द्र कुमार से चैम्बर अध्यक्ष आलोक मल्लिक की बात कराई। उन्होंने जामताड़ा में होने की बात कही और चैम्बर की शिकायतों के संबंध में कहा कि उनका वास्तव में फील्ड वर्क है तथापि वे कार्यालय में होने की कोशिश करते हैं। कार्यों में लेटलतीफी और अनियमितता को वे सिरे से नकारते रहे। जबकि कई व्यापारियों से बार-बार शिकायतें मिल रही है कि ऑफिस में उनका कोई भी काम समय पर नहीं होता। वे कहते हैं कि अब ऑनलाइन काम होता है और समय सीमा के अंदर सबका काम हो रहा है जबकि हकीकत कुछ और ही है। आप ऑनलाइन फीस जमा नहीं कर सकते क्योंकि अधिकारी ओटीपी जेनेरेट नहीं करते और इसीलिए व्यापारियों को ऑफिस दौड़ना पड़ता है। वहीं सीसी चार्ज (सुविधा शुल्क) के नाम पर मनमर्जी चार्ज लगाए जाते हैं। पता चला है कि सीसी चार्ज का एकाउंट राज्य सरकार का नहीं बल्कि स्थानीय अधिकारी के ही यहां रहता है। अंदरखाने भ्रष्टाचार के नाम पर भी व्यवसायियों के काम लटकाए जाने की शिकायत हैं। ऐसे में चैम्बर स्थानीय प्रशासन, विभागीय अधिकारियों और सरकार से मांग करती है कि मामले को संज्ञान में लेकर व्यवस्था को ठीक किया जाय। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को सही मायनों में धरातल पर लाए और कारोबार को सुगम बनाए। प्रतिनिधिमंडल में अजय कुमार, अशोक सरावगी, पवन बर्णवाल सहित कई अन्य व्यवसायी शामिल थे।
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