पत्रकारों ने एड़ी चोटी एककर पटना के पारस अस्पताल द्वारा बंधक बना रखे शव को छुड़वाया
राँची। बिहार के वरिष्ठ पत्रकार व पटना बख्तियारपुर निवासी सुनील सौरभ अब इस दुनिया में नहीं रहे। उन्होंने बिहार की राजधानी पटना के पारस अस्पताल में शनिवार को अंतिम सांस ली। सुनील सौरभ की पत्नी सुभद्रा सिंह उनके भाई पत्रकार नवल किशोर ने कई बार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से संपर्क साधा। उनसे मदद की गुहार लगाई। लेकिन नीतीश कुमार का दिल नहीं पसीजा और न ही वे वरिष्ठ पत्रकार सुनील सौरभ की मदद के लिए आगे आये।जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने बुधवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ट्वीट कर अस्पताल में इलाजरत जाने-माने पत्रकार/साहित्यकार सुनील सौरभ को यथासंभव मदद करने का अनुरोध किया था। जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व सांसद पप्पू यादव ने शुक्रवार को काफी दिनों से बीमार चल रहे पत्रकार सुनील सौरभ की आर्थिक मदद की थी। पटना के उत्तरी मंदिरी स्थित आवास पर उन्होंने पत्रकार सुनील सौरभ के बेटे को मदद स्वरूप 25 हजार रुपये की राशि प्रदान किया था। यह राशि उन्होंने पत्रकार हेल्प ग्रुप के पत्रकारों के आग्रह पर प्रदान की। सुनील सौरभ विगत लगभग चार दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहे। इधर इनकी मौत की खबर उनके भाई रांची के वरीय पत्रकार नवल किशोर सिंह से मिलते ही अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति की राष्ट्रीय कमिटी सहित बिहार इकाई भी सक्रिय हो गई। जिसमें बिहार के वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार सिंह की विशेष भूमिका रही।क्योंकि दिवंगत पत्रकार सुनील सौरभ के परिजनों द्वारा छः लाख रुपए देने के बाद शनिवार को उनकी मृत्यु उपरांत उनके शव को पटना स्थित पारस अस्पताल द्वारा बंधक बनाकर रख लिया गया था।जिससे एक तो परिजन पत्रकार की असामयिक मौत से बेहाल थे,इधर उन्हें मृतक का शव नहीं दिया जा रहा था।हालांकि बाद में पीड़ित परिवार को शव सौंप दिया गया।