चितरा I एस पी माइंस चितरा कोलियरी में 2.30 करोड़ की लागत से लगभग 700 मीटर लंबी आरसीसी सड़क निर्माण में बरती गई अनियमितता की चर्चा का बाजार गर्म है। इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है। उक्त सड़क का निर्माण माइंस के असैनिक विभाग की तरफ से कराया जा रहा है। जिसकी निविदा मुख्यालय स्तर पर निकाली गई थी। निर्माणाधीन आरसीसी सड़क क्षेत्रीय महाप्रबंधक कार्यालय के सामने से क्षेत्रीय भंडार गृह, विद्युत एवं यांत्रिक विभाग, पावर सबस्टेशन के बगल से गुजरती हुई सारठ बस्ती पालोजोरी सड़क मार्ग में मिलती है। जिसकी लंबाई लगभग 700 मीटर के आसपास बताई जाती है। इस संबंध में प्रदीप महतो ,विकास कुमार, संजीत महतो, धीरेंद्र चंद्र, परेश बाउरी, विजय यादव, कुंदन सिंह दीपक दास समेत दर्जनों लोग कहते हैं कि आरसीसी सड़क निर्माण में किस सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है। उसकी क्या मात्रा है। किस अभियंता के देखरेख में ढलाई कराई जा रही है। सीमेंट, गिट्टी, बालू आदि कहां से मिलाकर सड़क में डाला जा रहा है यह कोई नहीं जानता है। आरसीसी के नीचे डीएलसी कहीं तीन इंच कहीं चार इंच मोटाई की हो रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में भारी अनियमितता बरती जा रही है। इसमें प्राक्कलन घोटाला होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। एक मामूली सड़क निर्माण में 2.30 करोड़ खर्च हो। यह सबों के गले उतर नहीं रहा है। लोगों का कहना यह भी है कि रात के अंधेरे में अजय नदी से अवैध तरीके से बालू परिवहन कर यह एजेंसी राज्य सरकार को भी भारी-भरकम चुना लगा रही है। सड़क की गुणवत्ता प्राक्कलन आदि की उच्चस्तरीय जांच होने से निर्माण में बरती जा रही अनियमितता की कलई खुल सकती है।
2.30 करोड़ की सड़क में अनियमितता की जांच की मांग जोरों पर
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