सवांददाता(साहिबगंज) I जिले में कृषि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग झारखंड सरकार द्वारा कृषि अवसंरचना को (ए0आई0एफ0) से संबंधित जागरूकता अभियान सिद्धो कान्हू सभागार में उपायुक्त राम निवास यादव की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।इस क्रम में उपायुक्त समेत उप विकास आयुक्त प्रभात कुमार बरदियार, जिला कृषि पदाधिकारी सुबोध कुमार, संबंधित पदाधिकारियों एवं किसानों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। वही सभी का पौधा देकर स्वागत भी किया गया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त रामनिवास यादव ने जिले की विभिन्न इलाकों से आए किसानों का अभिनंदन किया एवं कहा कि हमारा जिला खेती के लिए वर्षा पर निर्भर तो है ही बल्कि गंगा नदी से भी बड़े पैमाने पर खेती होती है। भारत सरकार द्वारा एआईएफ के माध्यम से कृषकों की सुविधा खेती की व्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं इसके लिए संरचना निर्माण हेतु ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।इसी की जागरूकता के लिए आज विशेष रूप से कार्यशाला का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आप किसानों की किस प्रकार मदद की जाए जिससे उत्पादन बढ़े एवं किसान आर्थिक रूप से सबल हो सकें।उन्होंने सिंचाई के लिए मेड़बंदी, चेक डैम एवं अन्य योजनाओं के विषय में भी किसानों को अवगत कराया। साथ ही जिले में बनाए गए जिला स्तरीय कोल्ड स्टोरेज एवं प्रखंडों में बनाए गए कोल्ड स्टोरेज के विषय में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन कोल्ड स्टोरेज के माध्यम से हम वैसे फसल जिनकी उत्पादन हमारे जिले में वृहद पैमाने पर होती है उसे उस टूर कर सकेंगे जिससे किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा उन्होंने बताया कि पूर्व में जब वह जिले का भ्रमण करते तो पहाड़िया गांव में मकई के फसलों का भंडारण देखते थे परंतु वर्षा ना होने के कारण इस वर्ष मकई का उत्पादन भी कम हुआ है।जबकि उन्होंने कहा कि साहिबगंज जिले में पर्याप्त मात्रा में कई फसलों का बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। योजनाओं के तहत बीज वितरण भी किया जा रहा है। आप सभी किसान कई योजनाओं के तहत आवेदन कर बीज प्राप्त कर सकते हैं और उन्नत खेती कर वृहद पैमाने पर फसल का उत्पादन कर सकतें हैं।इसके लिए उन्होंने किसानों को मूल खेती से अलग सब्जी उत्पादन तथा अन्य खेती के लिए भी प्रेरित किया।साथ ही कहा कि आज जैविक खेती की ओर दुनिया अग्रसर है, धीरे-धीरे हमें भी खेती के मानकों में सुधार करने की आवश्यकता है तथा जैविक खेती की ओर बढ़ने की आवश्यकता है।इस क्रम में उपायुक्त ने जिले के सभी किसानों को बेरी के क्षेत्र में योगदान देने के लिए धन्यवाद किया एवं कहा कि आज वृहद पैमाने पर दूध कलेक्शन हो रहा है साथ ही उन्होंने कहा कि जिले में कोई उद्योग तो नहीं है परंतु अगर हम प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग उद्योग लगाएं तो जिले में होने वाले उत्पादों को अन्य जगह भेज सकते हैं।वहीं उन्होंने सभी किसानों से अपने संबंधित किसानों को भी एआईएफ से संबंधित जानकारियां देकर प्रसंस्करण प्रणाली एवं कृषि से संबंधित उद्योग स्थापित करने हेतु प्रेरित करने को भी कहा।इस क्रम में उपायुक्त राम निवास यादव ने कृषकों के बीच धान के बीज का वितरण भी किया। साथ ही किसानों से बातचीत करते हुए उन्होंने किसानों को खेती में नए तकनीक अपना कर उन्नत खेती करने के लिए प्रेरित भी किया। साथ ही कहा कि जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग किसानों को खेती में सहायता करने के लगातार तत्पर है एवं वह किसानों की हर संभव मदद भी करेगावही आगे कार्यशाला में किसानों को प्रेजेंटेशन के माध्यम से एआईएफ के लाभ, इसके उद्देश्य, इसमें आवेदन करने की प्रक्रिया, कौन-कौन सी इकाई स्थापित कर सकते हैं, कृषकों को इससे क्या सहयोग मिलेगा। किसानों को कितना ऋण मिल सकेगा, इसके लिए भारत सरकार द्वारा गारंटी दी जा रही है इसकी जानकारी,डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया तथा विभाग द्वारा दी जा रही मदद से संबंधित सभी जानकारियां दी गई।इस दौरान बताया गया कि किसान को सीधे उपभोक्ताओं के बड़े आधार पर बेचने की अनुमति देने के लिए बेहतर विपणन बुनियादी ढांचे और इसलिए किसानों के लिए मूल्य प्राप्ति में वृद्धि इससे किसानों की समग्र आय में सुधार करना ही ए0आई0एफ0) का उद्देश्य है।इससे रसद बुनियादी ढांचे में निवेश के साथ किसान कम फसल के बाद के नुकसान और कम संख्या में बिचौलियों के साथ बाजार में बेचने में सक्षम होंगे। यह आगे किसानों को स्वतंत्र और बाजार तक पहुंचे में सुधार करेगा।
आधुनिक पैकेजिंग और कोल्ड स्टोरेज सिस्टम की पहुंच के साथ किसान यह तय करने में सक्षम होंगे कि बाजार में कब बेचना है और कब उनके वसूली में सुधार होगी आवश्।यकता में सुधार और आदतों के अनुकूलन के लिए सामुदायिक कृषि परिस्थितियों के परिणाम स्वरूप किसानों को पर्याप्त बचत होगी।सरकार ब्याज अनुदान प्रोत्साहन और क्रेडिट गारंटी के माध्यम से समर्थन कर करके वर्तमान में अव्यव्हार्थ परियोजनाओं में प्राथमिकता वाले क्षेत्र को ऋण देने में सक्षम होगी।इससे कृषि में नवाचार और निजी क्षेत्र में निवेश का चक्र शुरू होगा क्रेडिट गारंटी के साथ प्रोत्साहन और ब्याज अनुदान देने वाली संस्था कम जोखिम के साथ उधार देने में सक्षम होगी यह योजना उनके ग्राहक आया आधार को बढ़ाने और पोर्टफोलियो और विविधीकरण में मदद भी करेगी।कृषि अवसंरचना कोष (ए0आई0एफ0) के तहत उपलब्ध लाभ।एआईएफ के तहत उपलब्ध लाभ क्रेडिट गारंटी 2 करोड़ तक के ऋण के लिए सूक्ष्म और लघु उद्यमों योजना के लिए क्रेडिट फंड ट्रस्ट के तहत इस वित्तपोषण सुविधा के पात्र उधार कर्ताओं के लिए क्रेडिट गारंटी कवरेज उपलब्ध होगा एफपीओ के मामले में दिए और एफपीओ प्पदोन्नति योजना के तहत बनाई गई सुविधा में क्रेडिट गारंटी का लाभ उठाया जा सकता है।प्रति लाभार्थी दो करो रुपए तक के ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी प्रतिबंधित है इसके लिए एआईएफ के तहत ऋण पर 3% प्रतिवर्ष की दर से ब्याज अनुदान 7 साल की अवधि के लिए दो करोड़ रुपए तक होगा दो करो रुपए से अधिक के ऋण के मामले में ब्याज अनुदान दो करो तक सीमित होगा ब्याज अनुदान प्रति परियोजना दो करो रुपए की सीमा तक सीमित है बताया गया कि 2020-21 से 2032-33 तक ऋण देने वाली संस्थाओं द्वारा 1445 करो रुपए का वितरण किया जाएगा।एआईएफ के लिए कैसे आवेदन करेंकार्यशाला में बताया गया कि कृषि अवसंरचना फंड के तहत पात्र लाभार्थियों को ₹20000000 तक के ऋण पर अधिकतम 7 वर्ष तक ब्याज में 03 प्रतिशत की छूट दी जा रही है इसके लिए आवेदन कैसे करें ऑनलाइन ऋण आवेदन लाभार्थी पोर्टल पर उपलब्ध आवेदन पत्र भरकर ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं।आवेदन के साथ आवेदक द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और संबंधित दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी पोर्टल पर अपलोड करें आवेदक लोन के लिए ऑनलाइन आवेदन देगा फिर भारत सरकार (CPMU-AIF) से आवेदन को सत्यापन के बाद बैंकों को लोन के लिए भेज दिया जाएगा बैंक आवेदन का मूल्यांकन कर आवश्यक दस्तावेज मांग करता है फिर बैंक लोन की राशि को सीधे आवेदक के खाते में भेजता है। बैंक का 3% ब्याज की सब्सिडी भारत सरकार की ओर से दी जाएगी।
एआईएफ के तहत ऋण प्राप्त कर निम्न उद्योग लगा सकते हैं।यह मार्केटिंग प्लेटफार्म सहित आपूर्ति श्रृंखला सेवाएं।गोदाम,भूमिगत कक्ष, पैकेजिंग इकाइयां एवं परख इकाइयां,कोल्ड स्टोर और कोल्ड चैन, रसद सुविधाएं,प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र,पकने वाले केंद्र,वैक्सिंग प्लांट,जैविक आदानों का उत्पादन,जैव उत्तेजक उत्पादन इकाइयां,स्मार्ट और सटीक कृषि के लिए बुनियादी ढांचा,निर्यात समूह सहित फसलों समूह के लिए, आपूर्ति श्रृंखला अवसंरचना प्रदान करने के लिए पहचान की गई परियो जनाएं पीपीपी के तहत केंद्र राज्य स्थानीय सरकारों या उनकी एजेंसियों द्वारा सामुदायिक कृषि संपत्ति या फसल के बाद प्रबंध परियो जनाओं के निर्माण के लिए प्रचारित परियो जनाएं।आवेदक ww w.agriinfa.dac.
gov पर आवेदन पत्र डाउनलोड कर आवेदन कर सकते हैं तथा आवश्यक दस्तावेजों की सूची देख सकते हैं।इस क्रम में उपायुक्त के अलावा,उप विकास आयुक्त प्रभात कुमार बरदियार,कृषि निदेशालय रांची के परियोजना प्रबंधक इकाई टीम लीडर प्रभास चंद्र दुबे,जिला कृषि पदाधिकारी सुबोध कुमार,कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अमृत झा, एवं अन्य उपस्थित थे।