मालिक के मरने पर मुखाग्नि देने शमशान पहुंच गया बछड़ा

भारत के झारखंड के हजारीबाग जिले के चंपारण से एक व्यक्ति के मरने पर उसके पुत्र के रुप में एक बछड़ा मुखाग्नि देने शमशान घाट पहुंच गया यही नहीं शव की परिक्रमा की ओर शव के चिंता की आग बुझने तक बछड़ा वही डटा रहा। चौपारण प्रखंड के चैथी गांव में शनिवार को देखने को मिला है। जहां अपने पशुपालक से एक बछड़े का अनुठा प्रेम व करूणा को देख सभी अभिभूत हो गए। जिसका सोशल मीडिया पर वीडियो भी काफी वायरल हो रहा है। बताया जाता है कि चैथी गांव के 80 वर्षीय बुजुर्ग मेवा ठाकुर की मृत्यु शनिवार को हो गयी। उनकी कोई संतान नही थी। वे अपने घर में पत्नी के साथ रहते थे। अपने घर में उन्होंने गाय और बछड़े बहुत ही प्रेम के साथ पाला था। उन्ही में से एक बछड़े को उन्होंने तीन महीना पहले ग्राम पपरो में बेच दिया था। गांव चैथी और पिपरो का सिमाना सटा हुआ है। अपने मालिक के मृत्यु की सूचना उसे कैसे प्राप्त हुआ कोई नहीं जानता है और वह अपने मालिक के घर चले आया।अपने मालिक की मृत्यु के बाद ना सिर्फ बछड़ा शव यात्रा में शामिल हुआ बल्कि शमशान घाट भी पंहुचा। शव यात्रा में अचानक बछड़े को शामिल देखकर पहले तो कुछ लोगो ने उसे भगाने का काफी प्रयास किया पर वो नहीं माना। तब बुजुर्गो के समझाने पर अंत में लोगो ने उसे भगाना बंद कर दिया। हैरानी तब हुयी जब श्मशान घाट में शव को निचे रखा गया तो बछड़ा वहां दौड़ कर पहुंचा और आपने पशुपालक बुजुर्ग को चूमने लगा। वही जोर-जोर से विलाप करने लगा। इससे भी बड़ी हैरानी यह हुई कि बछड़ा लोगो के साथ जलती चिता का परिक्रमा भी किया। यहां तक कि बछड़ा परिवार के लोगो के साथ शव जलने तक वही डटा रहा। लोगो का कहना है कि मेवाजी के निःसंतान होने के कारण शायद यह बछड़ा उनका पुत्र का कर्तव्य निभा रहा है। बरहाल यह चर्चा का विषय बना हुआ है। अगर आपने ऐसी कोई घटना देखी हो और उसका कोई विडिओ हो तो हमारे साथ साझा करें।
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