देवघर। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री के निर्देशानुसार शनिवार को नागरिक सुरक्षा अधिनियम 1955 के तहत प्रशासनिक तंत्र सुदृढ़िकरण एवं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1985 (संशाधित नियम) 2016 तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए चलाये जा रहे विभिनन योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन उप विकास आयुक्त डॉ0 कुमार ताराचन्द की अध्यक्षता में विकास भवन के सभागार में किया गया। इस दौरान कार्यशाला शुभारंभ उप विकास आयुक्त, प्रशिक्षु आईएएस एवं उपस्थित जनप्रतिनिधियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके अलावे कार्यशाला के दौरान उप विकास आयुक्त डॉ0 कुमार ताराचन्द ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए चलायी जा रही सभी योजनाओं का संवेदनशीलता के साथ क्रियान्वयन करना हम सभी की जिम्मेवारी व जवाबदेही है। साथ ही राज्य सरकार द्वारा इन वर्गों के लिए क्रियान्वित की रही विभिन्न योजनाओं एवं कल्याकारी कार्यक्रमों का लाभ प्राथमिकता के साथ उनतक पहुचे। आगे उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए बनायी गयी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करें, ताकि उन्हें हर संभव सहयोग व उनका अधिकार मिल सके। इसके अलावे कार्यशाला के दौरान उन्होंने जानकारी दी गयी कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1969 (संशोधित नियम) 2016 के तहत यह कानून उस व्यक्ति पर लागू होता है जो अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है और वह इस वर्ग के सदस्यों पर अत्याचार अथवा उत्पीड़न का अपराध करता है। इस कानून के अंतर्गत किय गये अत्याचार एवं उत्पीड़न जो दंडनीय अपराध है। इसके तहत जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करना उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाना। जबरन न खाने लायक या गुणाजनक वस्तु (मल मूत्र इत्यादि) खिलाना या पिलाना, उसे अपमानित करना। शरीर से बल पूर्वक कपड़ा उतारना सिर का मुंडन करना या जूतों की माला पहनाना भूछे हटाना काट देना। अनुसूचित जाति/जन जाति वर्ग की महिला की सजा भंग करना या इच्छा के विरूद्ध या बलपूर्वक उसका यौन शोषण करना। चेहरे को तकर सार्वजनिक रूप से घुमाना कोई भी ऐसा कार्य करना जो उसके सम्मान को नुकसान पहुंचाता हो। यौन दुर्व्यवहार भाव से छूना और ऐसी ही भाषा का उपयोग करना। मतदान नहीं करने देना या व्यक्ति विशेष के पक्ष में वोट देने के लिए मजबूर करना। चुनाव लड़ने से रोकना मतदान के पश्चात मारपीट, हिंसा करना। सामाजिक तथा आर्थिक बहिष्कार करना तथा धमकी देना। जमीन पर कब्जा कर लेना, जबरन खेती करना या फसल काट लेना गैर कानूनी ढंग से जमीन से बेदखल कर देना सिंचाई सुविधाओं तक जाने से रोकना। गाँव घर या उसके रहने की जगह को छोड़ने पर मजबूर करना। झूठा आरोप लगाना या झूठा मुकदमा दर्ज कर पसाना या कार्रवाई करना। उपयोग में लाये जानेवाले जलाशय या जल स्रोतों को गंदा या अनुपयोगी बना देना सार्वजनिक हैंडपम्प, कुएं, तालाब या जल सोत से पानी लेने से रोकना।
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