कई उपायुक्तो ने रस मलाई मानकर खा ली पत्थर की काली कमाई
पाकुड़। पाकुड़ जिले मे अवैध खनन का पर्दा उस समय उठा जब इस जिले में उपायुक्त दिलीप कुमार झा का आगमन हुआ और कई लीज अपने सगे संबंधियों को देने और लीज स्वीकृत मे भारी भरकम पैसे की लेन देन को लेकर चर्चा में रहा। तब इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री जन संवाद केंद्र में तत्कालीन रघुवर सरकार के समय दर्ज़ हुईं। उस वक्त भी अवैध खनन का समर्थन जिले के अधिकारियो ने किया। मामले को प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा गया। उस शिकायत को भी ज़िला के पदाधिकारियों ने भरपुर समर्थन किया और मामले को ठंडे बस्ते में डलवा दिया। पर शिकायत कर्ता ने हार नहीं मानी और उसने झारखंड उच्च न्यायालय का शरण लिया और जनहित याचिका दायर कर दी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सुजित नारायण प्रसाद की न्यायालय में हुई। उनके द्वारा कई आदेश अवैध खनन की रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया। पर उक्त निर्देश का अनुपालन नहीं किया गया और बेहिसाब अवैध खनन जारी रहा। जबकि यह जनहित याचिका 2018मे दर्ज़ की गई थी और इसमें कई आदेश लगातर जारी हुईं हैं पर अवैध खनन मे कमी नहीं आई। पुजा सिंघल प्रकरण के बाद ज़िला प्रशासन ने अवैध खनन को लेकर कई जगह छापेमारी तो कई जगहों पर केशर सील करके अपनी पीठ थपथपाई। ज़िला प्रशासन ने झारखंड उच्च न्यायालय तक को गुमराह करने की लिखित जवाब दायर किया। उसके जवाब का भी खंडन करते हुए सेफ्लीमेंट्री जवाब दायर किया गया, ताकी न्यायलय इनकी झांसे मे न आए। पर इस बीच प्रवर्तन निदेशालय ने भी कहा है की पाकुड जिले में भी अवैध खनन हुआ है और इसका पर्याप्त साक्ष्य हैं और इसके लिए पाकुड़ जिले के खनन पदाधिकारी दोषी हैं। इनके बाबजूद क्या जनहित याचिका पर इन्हे राहत मिल सकती है। राजस्व की लुट करने और करवाने वाले की आख़िर क्या हसरत होती हैं। इसकी एक झलक देखने को कई महाशय बड़े आतुर है।
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