नशा मुक्ति अभियान के लिए जोर शोर से लगे हैं लतीफ

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गोड्डा। लतीफ अंसारी पेशे से शिक्षक हैं। पोड़ैयाहाट प्रखंड के एक स्कूल में सहायक अध्यापक (पारा शिक्षक) पद पर कार्यरत हैं। लेकिन सिर्फ स्कूल में किताबी ज्ञान देना उनका मकसद नहीं है। लतीफ अंसारी का मकसद है समाज में नशा की बढ़ती प्रवृत्ति से लोगों को दूर करना। नशा के दलदल में धंसे लोगों को उससे बाहर निकालना। अपने अभियान को अंजाम तक पहुंचाने के लिए वह न दिन की परवाह करते हैं, न रात की। यही कारण है कि राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर 12 जनवरी को कड़ाके की ठंड के बावजूद लतीफ अंसारी तड़के 3 बजे सुबह साइकिल से भागलपुर के लिए रवाना हो गए और वहां से रात्रि करीब 11 बजे 174 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए वापस घर लौटे।भागलपुर में लतीफ अंसारी सर्वप्रथम कुप्पाघाट स्थित गंगा किनारे संतमत सत्संग के पवित्र स्थल पहुंचे। कुप्पाघाट से निकलने के बाद तिलकामांझी, सैंडिस कम्पाउंड , घंटाघर चौक, टीएनबी कालेज, नाथनगर, चंपानगर एवं अन्य जगहों पर युवाओं को नशा के प्रति जागरूक करने का कार्य किया।
दरअसल, समाज सुधार मंच के बैनर तले लतीफ अंसारी 2012 से ही नशा मुक्ति अभियान चला रहे हैं। सदर प्रखंड गोड्डा के कठौन गांव निवासी श्री अंसारी अपने समाज एवं आसपास के गांव में नशा के शिकार लोगों के परिवार की स्थिति को देख कर काफी द्रवित हैं। ‘नशा का जो हुआ शिकार, उजड़ा उसका घर परिवार’ के अनेक मामलों को अपनी आंखों से देख चुके लतीफ ने नशा से लोगों को दूर रखने का अभियान छेड़ दिया है। श्री अंसारी कहते हैं कि उन्होंने जब 2012 में देखा कि एक महिला अत्यधिक रक्त स्त्राव के कारण जीवन और मौत के बीच झूल रही थी। एक ग्रामीण डॉक्टर को बुलाकर उनका इलाज करने कहा गया। डॉक्टर को पुआल की ढेर (टाल) दिखाकर महिला के पति ने कहा कि इसे बेचकर शाम तक आपको पैसा दे देंगे। आप इलाज कीजिए। पुआल का ढेर तो शाम तक बिक गया, लेकिन पैसा डॉक्टर को नहीं मिल कर शराब में लग गया। नशेड़ी पति ने अपनी बीमार पत्नी एवं छोटे-छोटे बाल बच्चों की परवाह किए बगैर पत्नी के इलाज पर पैसा खर्च करने के बदले शराब पीने पर पैसा उड़ा देना ज्यादा अच्छा समझा। लतीफ अंसारी कहते हैं कि इस घटना ने उन्हें काफी झकझोर दिया। उन्हें लगा कि शराब के कारण उस शख्स ने न पत्नी की बीमारी की गंभीरता को समझा और न बच्चों का भविष्य।उस घटना को देखकर लतीफ अंसारी नशा मुक्ति अभियान पर लग गए हैं। साइकिल से ही वे नशा के विरोध में जागरूकता फैलाने के लिए दूर-दूर की यात्रा कर लेते हैं। श्री अंसारी कहते हैं कि उनके प्रयास से बहुत सारे लोग नशा छोड़ चुके हैं। गोड्डा के पूर्व अनुमंडल पदाधिकारी ऋतुराज ने श्री अंसारी के प्रयास की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित भी किया था। साथ ही जिन लोगों ने नशा छोड़ दिया, उन्हें प्रमाण पत्र भी दिया था।
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