सारठ अंचल कार्यालय का गड़बड़ झाला, दिव्यांग को परेशान कर डाला

मापी हुयी 23 मार्च,रिपोर्ट के नक्शे की तिथि 27 फ़रवरी

ओवरराइटिंग के प्रयास में कर दिया 27 अप्रैल

गड़बड़ झाला करने वाले कर्मियों पर कार्रवाई की मुख्यमंत्री और उपायुक्त से मांग

देवघर I सारठ अंचल कार्यालय का एक नया और अनोखा खेल सामने आया है मामले को जानकर यह क्लियर हो जाएगा कि निष्पक्ष कार्य और पक्षपात कार्य में क्या अंतर होता है? सूत्रों की मानें तो ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के द्वारा प्रखण्ड के बरमसिया गांव स्थित दोरहिया मोजा स्थित जोरिया में एक पुल का निर्माण करवाया जा रहा है।जिसमें भूमि मालिक मुकेश किशोर जो एक दिव्यांग है उनके द्वारा ऊक्त भूमि पर हो रहे कार्य को लेकर दाग नं 5 पर आपत्ति दर्ज करवाया था,जिसके तहत अंचलाधिकारी के निर्देश पर अमीन से ऊक्त भूमि की मापी की तिथि 23/3/2023 तय की गयी और मापी की खानापूर्ति कराते हुए दाग नंबर 5 की बजाय दाग नं 26 का प्रतिवेदन समर्पित किया गया। जबकि मुकेश किशोर का कहना है दाग नं 26 भी हमारी अपनी संपत्ति है और इसके लिए बजापते मुकेश किशोर ने अपना अभ्यावेदन उपायूक्त देवघर,अंचलाधिकारी सारठ, कार्यपालक अभियंता विशेष प्रमंडल देवघर और अनुमंडल पदाधिकारी मधुपुर को सभी संबंधित कागजातों के साथ समर्पित किया है,लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है और बदस्तूर काम जारी है।वहीं मापी के बाद ऊक्त भूमि के रिपोर्ट को आपत्तिकर्ता दिव्यांग मुकेश किशोर को उपलब्ध नहीं करवाया गया?दिव्यांग मुकेश किशोर ने किसी का सहारा लेकर अंचल कार्यालय भी गए पर उन्हें रिपोर्ट नहीं दिया गया और तकनीकी कारणों का हवाला दिया गया,बाध्य होकर श्री किशोर ने आरटीआई का सहारा लिए तब जाकर आनन फानन में 23/3/2023 की मापी की रिपोर्ट 17/4/2023 को उपलब्ध करवाया गया पर आश्चर्य देखिए रिपोर्ट के साथ संलग्न नक्शे की तिथि 27/2/23 की है।जबकि अमीन विश्वजीत महतो के हस्ताक्षर के नीचे ऊक्त तिथि 27/2/23 की ही है और सीआई अक्षय सिन्हा  ने जब हस्ताक्षर किया तो ऊक्त तिथि को बहुत प्रयास के बाद ओवर राइटिंग कर 27/2/2023 की जगह 27/4/2023 कर दिया जबकि रिपोर्ट में भी तिथि 25/3/2023 दर्शाया गया है और 27/4/2023 तो अभी आया भी नहीं है?बताते चलें कि मापी की तिथि 23/3/2023 थी। ऊक्त सभी कागजातों को देख कर ऐसा प्रतीत होता है अंचल कर्मी लोग किसी व्यक्ति विशेष के प्रभाव में आकर दिव्यांग की जमीन को बर्वाद करने पर तुले हुए हैं और जबरन संवेदक और विभाग के पक्ष में करनें के प्रयास में यह सब गड़बड़ झाला हो गया है ? बहरहाल इनके ऊपर कार्यवाई की मांग अब जमीन मालिक दिव्यांग मुकेश किशोर जिला के उपायूक्त मंजुनाथ भजंत्री और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कर रहे हैं । सूत्रों की मानें तो पूर्व में भी सीआई अक्षय सिन्हा के द्वारा बहुत सा गड़बड़ झाला अमीन विश्वजीत महतों से मिलकर किया गया हैं,यह बात और है की सीधी साधी सारठ की ग्रामीण जनता खुल कर विरोध नहीं कर पाते हैं पर यह मामला अब छनकर सामने आ गया है।जिला के उपायूक्त को तुरंत संज्ञान लेते हुए इन कर्मियों पर कार्यवाई करनें की जरूरत है।ताकि दिव्यांग मुकेश किशोर की खेती योग्य भूमि को बचाते हुए उन्हें न्याय मिल सके।यह तो था अंचल कार्यालय सारठ की काली खेल की फ़ाइल। अब अगर ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता के विभाग की बात करें तो सूत्रों के अनुसार जिस जगह पूल का निर्माण करवाया जा रहा है ऊक्त जगह पर कहीं अप्रोच रोड है ही नहीं ? तो आख़िर उस जगह पर  कार्यादेश कैसे दे दिया गया ? सरकार के पैसे को बंदरबांट कर कहीं यह कोई मोटी उगाही की व्यवस्था तो नहीं?यह पूरा मामला ही जांच का है ताकि दोषियों पर कार्यवाही की जा सके और दिव्यांग को न्याय मिल सके।

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