15 वर्षों में भी पूरा नहीं हुआ सड़क निर्माण,ग्रामीणों ने की निर्माण की मांग

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गिरिडीह। विकास योजनाओं के कार्य में आधा अधूरे कार्य के कारण किस तरह आम जनता को कठिन समस्याओं से जद्दो जहद करनी पड़ती है,यह सर्वविदित है।कभी कभार तो बिना कार्य किए ही रकम उठा लिए जाने के मामले सामने आ जाते हैं।

ऐसा ही एक मामला सामने आया है।

जिसमें संवेदक और आरईओ की कथित लापरवाही के कारण बीते 15 वर्षों से राजकीय मार्ग डोरंडा भाया मरपोका दुघरवा रोड को अधूरा छोड़ दिए जाने से आज इसकी स्थिति बदतर हो गई है। तीन वर्ष पूर्व रोड की बदहाली व जर्जर स्थिति से तंग आकर क्षेत्र के ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर धनवार बीडीओ, उपायुक्त गिरिडीह, पथ निर्माण विभाग तथा मुख्यमंत्री को आवेदन प्रेषित कर दोषी पदाधिकारियों पर कार्रवाई के साथ ही उक्त पथ का शीघ्र निर्माण करवाने की मांग की थी।  बता दें कि राजकीय राजमार्ग डोरंडा से टिपन महतो घर होते हुए खोटडीहा,नावायाहार, सबलाडीह, तेलोडीह, दुघरवा, मरपोका, पचरुखी होते हुए करीब 6 किलोमीटर के इस मार्ग में दर्जनों गांव पड़ता है जो धनवार प्रखंड मुख्यालय से जुड़ता है। इसका निर्माण 2008 में प्रारंभ कराया गया था। जिसमें मात्र बोल्डर बिछाने तक का कार्य हुआ था। मार्ग में कहीं भी नाली की व्यवस्था नहीं कराए जाने के कारण जगह जगह पर सड़क टूट गए हैं। पूरे मार्ग में बड़े-बड़े बोल्डर उभर कर ऊपर आ गए हैं। जिसके कारण लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो रहा है। ग्रामीणों के द्वारा कई बार इस मार्ग में निजी खर्च पर मोरम भी डलवाया गया है जिससे कुछ चलना आसान हुआ था। पर बारिश में मोरम, मिट्टी बह जाने के कारण रोड की स्थिति पुनर मुसको भव: जैसी हो गई है। जगह जगह पर सड़क धंस जाने के कारण रोड सकरा हो गया है। साथ ही कहीं भी गार्डवाल नहीं देने के कारण सड़क से सटे जमीन मालिकों द्वारा लगातार रोड़ का अतिक्रमण किया जा रहा है। वर्तमान में इस सड़क के कालीकरण की कोई संभावना दिखाई नहीं दे रही है जो विभागीय लापरवाही का परिचायक है। ग्रामीणों ने कहा कि 2015 में जेई एसके झा द्वारा पुनः इस रोड की मापी कर निर्माण की बात कही गई थी। लेकिन इसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। उनसे बात करने पर पता चला कि रिपोर्ट विभाग को दिया गया था। आगे की कार्यवाही विभाग पर निर्भर करती है। इस संबंध में पूर्व विधायक निजामुद्दीन अंसारी ने कहा कि संवेदक और विभाग की अनदेखी का परिणाम है जो 15 वर्षों से भी इसका काम नहीं हो सका है। झामुमो इस सड़क के निर्माण को लेकर कई बार मांग करती रही है। निर्माण की मांग करने वालों में श्रीकांत कुमार सिंह, समाज सेवी राजू पांडेय, कामदेव पांडेय, विजय कुशवाहा,सुभाष वर्मा, सतीश सहित कई ग्रामीणों के नाम शामिल रहे।

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