जलमीनार बनी शोभा की वस्तु घरों तक नहीं पहुंच रहा है पानी

IMG-20230103-WA0107
डुमरी। डुमरी पंचायत के हेटटोला और सिमराडीह गांव में पानी पीने के अभाव को देखते हुए सरकार द्वारा नल जल योजना के तहत मिनी जल मीनार का निर्माण कराया गया था। लेकिन सरकारी उदासीनता एवं ठेकेदार की मनमानी किए जाने के कारण आज सिर्फ शोभा की वस्तु बन कर रह गया है। जबकि पांच सौ घरों की एक बड़ी बस्ती में पीने का पानी का घोर समस्या उत्पन्न है। इसके बावजूद भी इस जल मीनार का उपयोग सिर्फ गाय और भैंसों के बांधने व मवेशियों का चारा रखने प्रयोग किया जा रहा है। लेकिन इस ओर ना तो पीएचईडी का ध्यान इस और है ना ही वरीय पदाधिकारियों तथा जनप्रतिनिधि कि ध्यान इस ओर पड़ी है वही सिमराडीह ग्रामीण मुकेश महतो का कहना है कि जल मीनार बनने के बाद यह योजना सिर्फ शोभा के वस्तु बनकर धरातल पर खंभे की भाती खड़ा है। जिसे अभी तक धरातल पर उतारा नहीं गया है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि जल मीनार चालू है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जब से जल मीनार लगा है तब से एक भी दिन ग्रामीणों को पानी नहीं मिला है जिसकी सूचना जनप्रतिनिधि व वरीय पदाधिकारियों को कई बार लिखित आवेदन के बावजूद आज तक कोई भी इसकी सुध लेने नहीं आये। ग्रामीणों ने कहा करीब पांच वर्षों से यह जलमीनार बेकार पड़ा हुआ है।
हेटटोला गांव में नल-जल सुविधा नहीं होने से हेटटोला निवासी सीतू मंडल ने बताया हेटटोला के लोगों को सात निश्चय योजना का किसी तरह की लाभ नहीं मिला है। लोग समस्या से जूझ रहे हैं। लोगों को पीने के पानी से निजात दिलाने को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों को मौखिक रूप से समस्या को दूर करने की मांग की गई। लेकिन आज भी हमारे गांव के लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। वही आज तक नल- जल का फायदा नहीं उठा पाया है। खास कर बढ़ती गर्मी में हेटटोला ओर सिमराडीह के सभी गांव में लगभग चापाकल व कुआं सूख जाता है। लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। वहीं गांव में बने करोड़ों रुपए की लागत से लाखों लीटर पानी रखने का जल मीनार बनाया गया है। जल मीनार से हेटटोला लोगों को पानी देने की बात 7 साल पहले कहा गया था लेकिन 7 साल बीत जाने के बावजूद भी लाखों लीटर पानी बर्बाद किया जा रहा है।
सिंचाई व्यवस्था नहीं रहने के कारण हजारों एकड़ जमीन बंजर पड़ा है लोगों ने बताया जमीन बंजर होने का मुख्य कारण पानी का कम होना है। यहां के किसान का खेती के पटवन का मुख्य स्रोत तालाब नदी के पानी से धान व गेंहूं का फसल का पैदावार करते थे। वही आज भी पंचायत दर्जनों गांव में पानी के अभाव में मूंग फसल की बुआई तक नही हुई है। फसल नही होने के कारण किसानों को परिवार चलाने के साथ साथ जानवरो के खिलाने मे भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
The short URL of the present article is: https://bharatbulletin.in/lroq

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *