जामताड़ा/ मेट्रिक व इंटर की परीक्षा झारखंड में आज से शुरू हो गई है। कई बच्चे एडमिड कार्ड लेकर परीक्षा केंद्रों में पहुंचकर परीक्षा दे रहे हैं। बेशक बच्चे भी शिक्षा के मंदिर में शिक्षा ग्रहण के लिए जाते हैं और शिक्षक उन्हें महारथ हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं लेकिन अगर शिक्षक ही लापरवाही पर उतर जाए तो वह उन बच्चों के भविष्य के साथ क्या होगा?
ऐसा ही मामला जामताड़ा के प्लस टू उच्च विद्यालय फतेहपुर से सामने आया है जहां बारहवीं की छात्रा कुमारी दीपा मंडल एक साल पीछे रह कर परीक्षा नहीं दे पाई। छात्रा एक साल से अच्छी तैयारी करने के बाद अपने सहपाठियों से पिछड़ गई। क्योकि विद्यालय के लिपिक ने छात्रा का फार्म ऑनलाइन नहीं किया जिसके बाद परीक्षा का एडमिड कार्ड ही नहीं पहुंचा, और परीक्षा से वंचित रह गई। उस समय अपनी गलतियों को स्वीकारते विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक मानधन हेम्ब्रम ने एक साल का पढ़ाई का खर्च देने का वादा किया था। लेकिन बीते किये वादों को प्राचार्य ने एक सिरे से नकार दिया।इधर
छात्रा का एक पिता उज्ज्वल मंडल एक दिहाड़ी मजदूर है लेकिन वह चाहता है कि उनकी एकलौती बेटी पढ़ लिखकर आगे बढ़े। इसलिए एक साल के बाद विद्यालय पहुंचकर पुनः परीक्षा का फार्म भरने के लिए विद्यालय के प्रधानाध्यापक से फीस माफ करने व वादे के मुताबिक खर्ज मांगते हैं लेकिन प्राचार्य उल्टा पुलिस को बुलाने की धमकी दे डालते हैं। पूछने के लिए मीडिया कर्मी का जुटान हुआ को देखकर विद्यालय अवधि के बीच ही छोड़कर घर चले गए। मनमानी करने वाले प्रभारी प्रधानाध्यापक पर जिला शिक्षा अधिकारी के पास अंततः अभिभावकों ने गुहार लगाकर उचित कार्रवाई की मांग की है।
इधर छात्रा का कहना है कि एक साल शिक्षक की गलती के कारण हमारी सारी तैयारी धरी की धरी रह गई। सारे साथी अच्छे नम्बरों से पास हो गए। मै अकेली रह गयी अब उस तरह से पढ़ाई में मन भी नहीं लग रहा । हालांकि इस साल भी ट्यूशन पढ़ी मेहनत की है टीचर इस खर्च उठाने को तैयार नहीं है ।
प्रधानाध्यापक के स्कूल में मनमानी रवैया से नाराज अभिभावकों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को लिखित शिकायत कर उचित कार्रवाई की मांग की है क्योंकि पूछने पर विद्यालय के प्रचार्य कोई बात का जबाब न देकर सीधे निकल जाते हैं।
इधर शिकायत मिलने के पश्चात डीईओ कृष्ण गोपाल झा ने जांच कमेटी बैठाकर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन पीड़ित अभिभावक और छात्रा को दिया है।
अब देखना यह होगा कि कब तक ऐसे लापरवाह शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई होती है और शिक्षा विभाग में सुधार होता है।
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