ISRO का नया सैटेलाइट क्यों है खास?

Bharat Bulletin | टेक्नोलॉजी |

WhatsApp Image 2026-10-30 at 11.06.26

भारत अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आज 30 अक्टूबर 2026 की रात अपना नया नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 लॉन्च करने की तैयारी में है।

इस मिशन को भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका उद्देश्य देश के अपने नेविगेशन सिस्टम NavIC को और मजबूत बनाना है।

ISRO के अनुसार, इस सैटेलाइट को GSLV-F18 रॉकेट की मदद से रात 11:51 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया जाना निर्धारित है।

आखिर क्या है भारत का अपना GPS यानी NavIC?

जब भी हम Google Maps पर अपनी लोकेशन देखते हैं या किसी रास्ते का पता लगाते हैं, तो इसके पीछे सैटेलाइट नेविगेशन तकनीक काम करती है।

दुनिया में GPS (Global Positioning System) काफी लोकप्रिय है, जिसे अमेरिका संचालित करता है।

लेकिन भारत भी इस क्षेत्र में पीछे नहीं है। भारत ने अपना खुद का नेविगेशन सिस्टम विकसित किया है, जिसका नाम NavIC (Navigation with Indian Constellation) है।

यह सिस्टम भारत और इसकी सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में लोकेशन, नेविगेशन और सटीक समय से जुड़ी सेवाएँ प्रदान करने के लिए बनाया गया है।

NVS-03 सैटेलाइट में क्या होगा खास?

WhatsApp Image 2026-10-30 at 11.06.20

NVS-03 दूसरी पीढ़ी के NavIC सैटेलाइट सिस्टम का तीसरा सैटेलाइट है।

इसमें कई महत्वपूर्ण तकनीकी विशेषताएँ शामिल हैं:

1. स्वदेशी Atomic Clock: इस सैटेलाइट में भारत में विकसित Atomic Clock के साथ अन्य खरीदी गई Atomic Clocks भी लगाई गई हैं। ये नेविगेशन सिस्टम में सटीक समय की गणना के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं।

2. L1, L5 और S-Band Signals: NVS-03 में L1 सिग्नल बैंड के साथ L5 और S बैंड भी शामिल हैं। इससे NavIC की सेवाओं और अलग-अलग नेविगेशन रिसीवर्स के साथ इसकी उपयोगिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

3. लगभग 2,250 किलोग्राम वजन: यह सैटेलाइट लगभग 2,250 किलोग्राम का है और इसे GSLV-F18 रॉकेट के माध्यम से Geosynchronous Transfer Orbit में भेजा जाएगा।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन?

भारत का NavIC सिस्टम देश की अपनी स्वतंत्र नेविगेशन तकनीक है। इसका इस्तेमाल परिवहन, समुद्री नेविगेशन, आपातकालीन सेवाओं और रणनीतिक कार्यों में किया जा सकता है।

पिछले कुछ समय में भारत के नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम को तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया NVS-02 सैटेलाइट अपनी निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच पाया था।

ऐसे में NVS-03 का सफल प्रक्षेपण और उसके बाद उसका सही कक्षा में स्थापित होना NavIC सिस्टम को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

क्या भविष्य में भारत का NavIC GPS की जगह ले सकता है?

WhatsApp Image 2026-10-30 at 11.14.46 (1)

यह सवाल काफी दिलचस्प है।

NavIC और GPS दोनों का काम लोकेशन और नेविगेशन सेवाएँ प्रदान करना है, लेकिन दोनों की कवरेज अलग-अलग है।

GPS दुनिया भर में सेवाएँ प्रदान करता है, जबकि NavIC मुख्य रूप से भारत और आसपास के क्षेत्र के लिए बनाया गया है।

इसलिए फिलहाल NavIC को GPS का वैश्विक विकल्प कहना सही नहीं होगा। हालांकि, भारत के लिए अपनी स्वतंत्र नेविगेशन तकनीक विकसित करना तकनीकी और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।

The short URL of the present article is: https://bharatbulletin.in/r8x6

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *