ऐतिहासिक है बौंसी का मेला, अब मन्दार महोत्सव के नाम से आयोजन

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बौंसी। मेले और उत्सवों से जुड़ा हुआ है भारतीय सांस्कृतिक इतिहास का स्वरूप । इसी क्रम में मंदार क्षेत्र में लगने वाला बौसी मेला बिहार का सबसे बड़ा दूसरा मेला है। यह बॉसी का प्रसिद्ध मेला समुद्रमंथन और मधुसूदन भगवान की अमर गाथाओं से जुड़ा है । मान्यता है कि इसी पर्वत से समुद्र में मथानी बनाकर समुद्र मंथन किया गया था जिससे 14 महारत्नों की प्राप्ति हुई थी। बौंसी में लगने वाले इस मेले का इतिहास मंदार पर्वत और पापहरणी सरोवर से जुड़ा है।पहले यह मेला पर्वत के नीचे लगता था तब भगवान की प्रतिमा पर्वत पर विराजमान थे , अब यह मेला मंदार पर्वत के दक्षिण बसी बौंसी नगरी में लगती है।एक महीने तक चलने वाला मौसी का यह मेला 14 जनवरी मकर संक्रांति के अवसर पर लगता है । इस मेले में बिहार झारखंड और बंगाल के विभिन्न समुदायों के वनवासी बंधु तीर्थ करने आते हैं। खासतौर से इस मेले का इतिहास आदिवासियों की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी हुई है । मकर संक्रांति से कुछ दिन पूर्व से ही मंदार क्षेत्र में देश के कोने कोने से वनवासी बंधु आने लगते हैं, ये वनवासी बंधु मंदार पर्वत स्थित राम झरोखा स्थित पिंड पर उत्कीर्ण राम के चरण चिन्ह का दर्शन एवं पूजन करने आते हैं । अब यह मेला सरकार के द्वारा राजकीय मेला घोषित कर दिया गया है । जिससे सरकारी राशि से मेले को इंन्द्रधनुषी रंगों में सजाया जाता है । कई मनोरंजक खेल तमाशे के कार्यक्रम दिन-रात चलते रहते हैं । खासतौर से बिहार सरकार के द्वारा पंचदिवसीय कार्यक्रमों से मंदार महोत्सव मनाने की परंपरा शुरू कर दी गई है । इस महोत्सव में सरकार के मुख्यमंत्री सहित कई नामचीन मंत्रियों का आगमन होता है, साथ ही , मंच पर चलने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में देश के नामचीन कलाकारों के कार्यक्रम शामिल होते हैं , जिसमें फिल्म जगत से जुड़े हुए कई कलाकार भी लोगों का मनोरंजन करने आते हैं । इस मंदार महोत्सव के सांस्कृतिक मंच पर प्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलोटा सिने सिंगर विनोद राठौड़ , शब्बीर कुमार जैसे कलाकार भी प्रदर्शन कर चुके हैं। इस मंदार महोत्सव के अवसर पर मेला प्रबंधन समिति के द्वारा एक स्मारिका का भी विमोचन कराया जाता है। इस मंच पर चलने वाले साप्ताहिक कार्यक्रमों में स्थानीय साहित्यकारों कवियों का भी योगदान सराहनीय होता है । कई बार देश के नामचीन कवियों को बुलाकर कवि सम्मेलन कराया जाता रहा है। इस कार्यक्रम में में जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन बांका का भी सहयोग प्राप्त होता है । स्थानीय साहित्यकारों में कवि अनूप , प्राण मोहन प्राण, डॉक्टर अचल भारती ,उदयेश रवि , मनोज कुमार मिश्र , उमाकांत यादव प्रेम ,सहित अन्य की भूमिका सराहनीय होती है। 
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