ईट,बालू ,छर्री को रोकने से आम जनों की बढी परेशानी मारे जा रहे हैं रोजी-रोटी

अगर सरकार नहीं की सुधार तो किया जाएगा आंदोलन

हजारीबाग I टास्क फोर्स एवं अवैध उत्खनन रोकने का उपायुक्त आदेश मिलते ही जिले के सभी विभाग सक्रिय हो गए ।एक ओर जहां खनन विभाग तो दूसरे मे प्रदूषण विभाग तो वही प्रखंडों में अंचलाधिकारी एवं थाना भी अवैध खनन  रोकने के लिए सक्रिय हो गया। जिले के कई स्थानों पर अवैध उत्खनन को रोकने के लिए छापामारी करते हुए कहीं हाईवा ट्रक तो कहीं कई ट्रैक्टर को जप्त किया गया है । जिससे अवैध बालू, पत्थर कोयले सहित अन्य चीजों का उत्खनन एवं तस्करी ना हो पाए वही आम जनता की आवश्यकता के लिए कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जहां एक और सरकार के आदेशों का पालन करने के लिए सभी विभाग सक्रिय हैं। वही आम जनता के आवश्यक उपयोग हेतु बालू एवं पत्थर की आवश्यकता पड़ रही है । गरीबों को ईट बालू छर्री की आवश्यकता पड़ रही है। इन सभी की आपूर्ति के लिए गरीबों के परेशानी की सामना कर पड़ रहा है। जो सामान सस्ते मूल्य पर उपलब्ध होते थे। उन सभी सामानों को दुगुने दर पर लेने में मजबूरी हो रही है। इससे गरीबों का जेब कतरने का काम किया जा रहा है। वही कुछ जनप्रतिनिधियों ने कहा कि बालू ,ईट एवं छर्री को छूट देना चाहिए। जिससे आम जनता को राहत मिल सके । यदि बालू छर्री एवं ईट जो भवन निर्माण में आवश्यक तत्व माने जाते हैं। अगर इनमें छूट न दी जाए । तो आम जनता के साथ मिलकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं नेतागण आंदोलन भी करेंगे।

क्या कहते हैं सामाजिक कार्यकर्ता एवं नेता 

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव महेंद्र राम ने कहा कि यदि सरकार ईट बालू एवं छर्री पर जो भी निश्चित राशि हो वह तय करके सरकार को राजस्व का वसूली करनी चाहिए। जिससे आम जनता पर अवैध वसूली का भार न पड़े। क्योंकि इस प्रकार की काम करने से अंचल एवं थाना की कमाई बढ़ जाती है। उनके द्वारा अवैध वसूली करके ईट बालू छवि दोगुने दामों में गरीबों तक पहुंचाने का काम किया जाता है। जिससे गरीबों का जेब और गरीब होते जा रही है ।अगर सरकार इस पर ठोस निर्णय नहीं लेती है। तो जनता के साथ हम लोग मिलकर आंदोलन करेंगे। 

सीपीएम नेता गणेश कुमार सीटू ने बताया कि ईट, बालू ,छर्री की रोकथाम से आम गरीब जनता को नुकसान होती है। जिससे जिले में हजारों लोगों की आवास योजना अधर में लटक जाता है ।क्योंकि उन्हें जिस तरह का प्राक्कलन अनुसार राशि मिलती है। उस प्राक्कलन से ज्यादा खर्च गिर जाता है। और गरीब लोग कर्ज में फंस जाते हैं। वही प्रशासन द्वारा रोकथाम करने से सामग्री का दाम दोगुना हो जाती है। इसमें सरकार को एक निश्चित राशि तय कर लीज करवानी चाहिए।

भाजपा नेता सह समाजसेवी नंदलाल मेहता ने बताया कि ईट बालू एवं छवि को जो इस प्रकार की अवैध खनन का नाम देकर के आम जनता को परेशान किया जा रहा है इससे सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारियों को कमाई बढ़ जाती है एवं जनता को बेफिजूल परेशान किया जाता है अगर सरकार इस पर निर्णय नहीं लेती है तो हम लोग आम जनता के साथ मिलकर जनहित की लड़ाई लड़ने को मजबूर हो जाएंगे इसके लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है ।

वही मानवाधिकार एव आरटीआई संगठन के युवा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष देव कुमार राज ने बताया कि ईट बनाने के लिए गरीबों को शोषण किया जाता है। जो सरकारी कर्मचारी गिद्ध दृष्टि लगाए हुए रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ईट, बालू छर्री का काम से कई लोगों का रोजी रोजी बढ़ती है। जिससे कई परिवार का जीवन यापन होता है ।इस प्रकार की अवैध शब्द का उपयोग करके सरकार द्वारा या सरकारी अधिकारी के द्वारा रोकथाम करने से एक तो गरीबों का रोजी-रोटी को मारा जा रहा है। वही सरकारी अधिकारी द्वारा अवैध वसूली करते हैं ।जो जघन्य अपराध है। इसमें जनता एकजुट हो रही है, और हम लोग बृहद आंदोलन करेंगे।

 जेएमएम के पूर्व जिला प्रवक्ता नौशाद आलम ने बताया कि ईट, छर्री, बालू का परिवहन एवं आपूर्ति में रोकथाम करना आम जनता को परेशान करने के बराबर है। इससे सरकारी अधिकारियों की आमदनी बढ़ती है।वही आमजन का शोषण होता है।

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