नई दिल्ली: भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अब एक बिल्कुल ही नया और अनोखा ट्रेंड देखने को मिल रहा है। पारंपरिक रैलियों और नारेबाजी से हटकर, इस बार तकनीकी विशेषज्ञों, युवाओं और एक्टिविस्टों के एक नए समूह ‘डिजिटल वोटर्स गार्ड’ (Digital Voters Guard) ने पूरी तरह से डिजिटल और विजुअल तरीके से मोर्चा खोल दिया है।
राजधानी दिल्ली समेत बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद जैसे तकनीकी हब में युवाओं ने ‘ब्लैक-डॉट’ (काला टीका/बिंदु) और ‘क्यूआर-प्रोटेस्ट’ अभियान की शुरुआत की है। इस अनोखे प्रदर्शन के तहत युवा अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर काली पट्टी की जगह एक विशिष्ट QR कोड लगा रहे हैं, जिसे स्कैन करने पर निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची (Voter List) में कथित विसंगतियों और डिलीट किए गए वोटों का डेटा सीधे सामने आ जाता है।
इस अनोखे प्रदर्शन की मुख्य विशेषताएं:
QR कोड आधारित विरोध: प्रदर्शनकारी अपने कपड़ों और पोस्टरों पर एक ऐसा QR कोड पहन रहे हैं, जिसे स्कैन करने पर लोग सीधे उस डिजिटल पोर्टल पर पहुंच जाते हैं जहाँ मतदाता सूची के आंकड़ों का विश्लेषण दिया गया है।
सड़क पर ‘मूक मार्च’: दिल्ली के कनॉट प्लेस और मुंबई के मरीन ड्राइव पर युवाओं ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर और हाथों में ‘माई वोट, माई राइट’ के डिजिटल पैड लेकर पूरी तरह से शांत रहकर अनोखा मार्च निकाला।
एआई (AI) आधारित फैक्ट-चेकिंग: इस ग्रुप ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बॉट लॉन्च किया है, जो आम नागरिक के मतदाता पहचान पत्र (EPIC Number) को डालकर तुरंत यह जांच कर सकता है कि उसका नाम मौजूदा सूची में सक्रिय है या नहीं।
विशेषज्ञों की राय: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पारंपरिक राजनीति से इतर यह डिजिटल और जन-सहभागिता वाला विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि अब चुनावी पारदार्शिता की लड़ाई केवल सियासी दलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि तकनीक-प्रेमी युवा इसे अपने हाथ में ले रहे हैं। निर्वाचन आयोग की ओर से हालांकि अभी तक इस नए प्रकार के डिजिटल प्रोटेस्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है।