आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान की पहल, संस्कृतमय हो आज और कल
पटना I उनींदा गांव का जब हर गली कूंचा, रतजगा करना हमारा फर्ज है कुछ इसी अंदाज में बुधवार से शुरू चैत्र प्रतिपदा शुक्ल पक्ष भारतीय नववर्ष की पहचान चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य स्मृति पर्व के रूप में पिछले 10 दिन से संस्कृत संभाषण शिविर चलाकर आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के अंतर्गत भारतीय संस्कृति के प्रति जनसाधारण को जगाया जा रहा है. अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मुकेश कुमार ओझा के अनुसार 22 मार्च बुधवार को संस्कृत संभाषण प्रतियोगिता के साथ शिविर सम्पन्न होगा. आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान सर्वत्र संस्कृतं एवं विहार संस्कृत संजीवन समाज, पटना की ओर से संचालित है. 12 मार्च से 21 मार्च तक चले सम्राट विक्रमादित्य राष्ट्रीय संस्कृत संभाषण शिविर का उद्घाटन विशेष सचिव गृह उप्र शासन एवं संस्कृतज्ञ डॉ. अनिल कुमार सिंह ने किया और प्रतिदिन नियमित शिविर में भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत भाषा के महत्व को रेखांकित किया. दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े अरविन्द महाविद्यालय के सहायक आचार्य पिन्टू कुमार के सफल संयोजन में सर्वत्र संस्कृत अभियान को गति देते हुये पटना के वरीय संस्कृत प्रचारक डॉ. मिथिलेश झा, गंगा देवी महिला महाविद्यालय की सह आचार्या डॉ. रागिनी वर्मा, उच्च न्यायालय के अधिवक्ता उग्रनारायण झा, डॉ. अनिल चौबे, संस्कृत प्रवक्ता सुषमा सिंह, दिल्ली के संस्कृत प्रवक्ता डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिन्हा आदि संस्कृत सेवियों ने शिविर को जीवन्तता प्रदान की. संस्कृत प्रचार अभियान का संबल बने दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग और पटना के विभिन्न विद्यालयों से लेकर देशभर के संस्कृत शिक्षकों-शिक्षिकाओं के साथ विद्यार्थी जिन्होंने विभिन्न विषयों पर संस्कृत में उल्लास और उमंग से सराबोर होकर विचार रखे. जिनमें उपासना आर्य, अनामिका, श्रद्धा कुमारी, कलकत्ता की सुजाता घोष, प्रेमलता, श्वेता कुमारी, वीजेंद्र सिंह, नीलम खासा, चंद्रकांत, प्रभात यादव, प्रदीप कुशवाहा, कृष्ण कांत आदि ने संस्कृत में विचार रखे.