मधेपुरा। दर्शनशास्त्र विभाग, बीएनएमयू, मधेपुरा के तत्वावधान में बुधवार को शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् (आईसीपीआर) नई दिल्ली के स्टडी सर्किल योजनान्तर्गत एक संवाद एवं परिचर्चा आयोजित है। इसमें में आईसीपीआर के सदस्य-सचिव प्रो. (डॉ.) सच्चिदानंद मिश्र भारतीय दर्शन में क्या भारतीय है विषय पर व्याख्यान देंगे। खास बात यह है कि वे पहली बार इस विश्वविद्यालय के किसी कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।
आईसीपीआर के पूर्व अध्यक्ष करेंगे अध्यक्षता
आयोजन सचिव डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता दर्शनशास्त्र विभाग, पटना विश्वविद्यालय, पटना के पूर्व अध्यक्ष सह आईसीपीआर, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रमेशचंद्र सिन्हा करेंगे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि दर्शनशास्त्र विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के पूर्व अध्यक्ष सह अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) जटाशंकर होंगे। अतिथियों का स्वागत दर्शनशास्त्र विभाग, पटना विश्वविद्यालय, पटना की पूर्व अध्यक्ष सह दर्शन परिषद्, बिहार की अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) पूनम सिंह करेंगी। कार्यक्रम में विशेष रूप से टिप्पणी एवं प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन भी किया जाएगा।
हो चुके हैं नौ संवाद
डॉ. शेखर ने बताया कि बीएनएमयू, मधेपुरा में अप्रैल 2022 से स्टडी सर्किल कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। इसके अंतर्गत सांस्कृतिक स्वराज, गीता का दर्शन, मानवता के लिए योग, भारतीय दर्शन में जीवन-प्रबंधन, प्रौद्योगिकी एवं समाज, समाज- परिवर्तन का दर्शन, गांधीवाद : सिद्धांत एवं प्रयोग, युवाओं के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश एवं वैदिक दर्शन का मानवतावादी दृष्टिकोण विषयक संवाद हो चुके हैं। इन संवादों के वक्ता क्रमशः प्रो. रमेशचन्द्र सिन्हा (नई दिल्ली), प्रो. जटाशंकर, (प्रयागराज), प्रो. एन. पी. तिवारी (पटना), प्रो. इंदु पांडेय खंडुरी (गढ़वाल), डॉ. आलोक टंडन (हरदोई), प्रो. पूनम सिंह (पटना), डॉ. मनोज कुमार (वर्धा), माधव तुरूमेला (लंदन) एवं डॉ. गोविन्द शरण उपाध्याय (नेपाल) थे। इसी कड़ी में दसवां (इस वर्ष का पहला) संवाद बुधवार को सुनिश्चित है।
मार्च 2023 तक चलेगा कार्यक्रम
उन्होंने बताया कि आगे स्टडी सर्किल के अंतर्गत फरवरी एवं मार्च में भी संवादों का आयोजन होना है। इसके लिए डॉ. मुरलीधर पांडा (दक्षिण अफ्रीका), डॉ. वैद्यनाथ लाभ (नालंदा), डॉ. रजनीश कुमार शुक्ल (वर्धा), डॉ. अम्बिका दत्त शर्मा (सागर) आदि विद्वानों से अनुरोध किया जा रहा है। वक्ताओं से सहमति मिलने के बाद विषयों का निर्धारण किया जाएगा।
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