जामा I भाजपा नेता सुरेश मुर्मू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि झारखंड में नियोजन नीति को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है. इससे राज्य के बेरोजगार युवा मुश्किल में हैं. हालत यह है कि वे पढ़ाई पूरी करने के बाद भी राज्य सरकार की नौकरी के लिए प्रतियोगी परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं. पहले तो बहाली नहीं, फिर वैकेंसी निकलती है, तो चयन प्रक्रिया पूरी होने में विलंब होता है. सब कुछ होने के बाद जब नियुक्ति का समय आता है, तो मामला कोर्ट पहुंच जाता है और सारी प्रक्रिया पर विराम लग गया. युवा प्रतीक्षा करते रहते हैं और तब तक उनकी उम्र ही निकल जाती है. झारखंड गठन के वर्षों बाद भी स्थानीय नीति और नियोजन नीति नहीं बन पायी है या यों कहें नीति राजनीति का शिकार हो गयी है. यह सरकार की कमजोर इच्छाशक्ति को दर्शाता है. जब 60: 40 के फार्मूले को नाकारा जा रहा है, तो सरकार को इस दिशा में पहल कर शीघ्र त्रुटिरहित नियोजन नीति बनाकर युवाओं के भविष्य को अधर में लटकने से बचाना चाहिए।
पिछड़ा वर्ग का सर्वेक्षण भी हेमंत सरकार ने बंद कराया।
उन्होंने कहा कि पिछड़ों को आबादी के अनुरूप आरक्षण देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास भाजपा कार्यकाल में सर्वेक्षण का कार्य जस्टिस लोकनाथ प्रसाद के नेतृत्व वाली कमिटी को दिया गया था. वर्ष 2019 में शुरू कराये गये परंतु दुर्भाग्य की बात यह है कि इस सर्वेक्षण कार्य को हेमंत सरकार आते ही बंद करा दिया. जबकि चुनावी वादे में भी झामुमो ने एसटी को 28 प्रतिशत और पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की बात सरकार बनने के महज तीन माह के अंदर देने की बात कही थी, पर दो साल होने के बाद भी आरक्षण पर कोई घोषणा यह सरकार नहीं कर सकी है।