
भागलपुर | रेलवे समाचार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अमृत भारत स्टेशन योजना (ABSS) के तहत देश के 20 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्विकसित 75 रेलवे स्टेशनों को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। लगभग ₹1,570 करोड़ की लागत से विकसित इन स्टेशनों का उद्देश्य यात्रियों को आधुनिक, सुरक्षित और विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है, साथ ही स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित रखना है।
पूर्व रेलवे का सातवां अमृत भारत स्टेशन बनेगा शिवनारायणपुर
पूर्व रेलवे के अंतर्गत अमृत भारत स्टेशन योजना में कुल 64 रेलवे स्टेशनों का चयन किया गया है। इनमें से छह स्टेशनों का लोकार्पण पहले ही हो चुका है। 17 जुलाई को मालदा मंडल के शिवनारायणपुर रेलवे स्टेशन के उद्घाटन के साथ यह पूर्व रेलवे का सातवां स्टेशन होगा, जिसे प्रधानमंत्री राष्ट्र को समर्पित करेंगे।
₹17.94 करोड़ की लागत से हुआ आधुनिक पुनर्विकास
शिवनारायणपुर रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास अमृत भारत स्टेशन योजना के प्रथम चरण में ₹17.94 करोड़ की स्वीकृत लागत से किया गया है। स्टेशन को आधुनिक यात्री सुविधाओं के अनुरूप विकसित करते हुए बिहार की सांस्कृतिक पहचान को भी प्रमुखता दी गई है। स्टेशन की आंतरिक सजावट में मधुबनी चित्रकला और स्थानीय विरासत से जुड़ी कलाकृतियों का उपयोग किया गया है।
भागलपुर के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
भागलपुर जिले का प्रमुख रेल प्रवेश द्वार माने जाने वाले शिवनारायणपुर रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। इसके साथ ही क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, पर्यटन और रोजगार तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। स्टेशन का नया स्वरूप आधुनिक वास्तुकला और स्थानीय सांस्कृतिक पहचान का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत करता है।
यात्रियों को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं
पुनर्विकसित स्टेशन पर यात्रियों के लिए कई नई सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिनमें शामिल हैं—
- आधुनिक एवं वातानुकूलित प्रतीक्षालय
- डिजिटल यात्री सूचना प्रणाली
- आधुनिक शौचालय
- बेहतर प्रकाश व्यवस्था
- स्पष्ट साइनेज
- नया फुट ओवर ब्रिज
- लिफ्ट की सुविधा
- पार्किंग क्षेत्र
- दिव्यांगजन के लिए सुगम पहुंच
- विस्तृत परिसंचरण क्षेत्र और आकर्षक हरित परिसर
विरासत और विकास का संगम
स्टेशन के डिजाइन में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत से प्रेरित स्थापत्य शैली को शामिल किया गया है। आधुनिक सुविधाओं के साथ स्थानीय संस्कृति और इतिहास को प्रदर्शित करने का प्रयास इसे एक विशिष्ट पहचान देता है। यह परियोजना भारतीय रेल की आधुनिक, सतत और यात्री-केंद्रित अवसंरचना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।